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सीएचसी सीयर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला, मनमर्जी से आते हैं चिकित्सक व कर्मचारी

(अशोक जायसवाल)
बिल्थरारोड/बलिया। सीएचसी सीयर में भारी अव्यवस्था के चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल पर चिकित्सकों अथवा कर्मचारियों के आने-जाने का समय उनकी मनमर्जी पर निर्धारित है। सरकार बदल गयी लेकिन चिकित्सकों व कर्मियों का तौर तरीका नहीं बदला। प्रतिदिन साढ़े तीन सौ ओपीडी वाला यह अस्पताल पूरी तरह से बदहाल हो चुका है। सरकार द्वारा 8 से 2 बजे तक का समय निर्धारण के बावजूद साढ़े 9 बजे तक अस्पताल मे मरीजों को चिकित्सक का इंतजार था। यहां तक कि दवा व पर्ची कटने तक के काउन्टर पर कोई उपस्थित नही था। इस सम्बन्ध में एसडीएम द्वारा रिपोर्ट तलब करने पर अस्पताल के अधीक्षक द्वारा उपस्थिति रजिस्टर पर कर्मचारियों व चिकित्सकों को अनुपस्थित कर उसकी फोटो वाट्सऐप के माध्यम से एसडीएम को भेजे जाने पर वहां अफरा तफरी की स्थिति रही।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि प्रदेश के चिकित्सालयों के दिन बहुरेंगे। शुरूवाती दौर में मुख्यमंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के द्वारा अस्पताल व अन्य सरकारी दफ्तरों के निरीक्षण से जनता को कुछ अलग की उम्मीद जग गयी थी। परन्तु एक साल बीतते बीतते यह उम्मीद भी टूट गयी। आज सीएचसी सीयर की हालत यह है कि निर्धारित समय के एक घंटे बाद भी अगर आप अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां कई चिकित्सक व कर्मचारी नदारद ही मिलेंगे। इन कर्मचारियों पर विभागीय अधिकारियों का कोई खौफ नजर नही आता है। तीन जिला मऊ, देवरिया व बलिया की सरहद पर अवस्थित सीएचसी सीयर मुख्य सरकारी चिकित्सालय होने के बावजूद यहां अव्यवस्थाओं का अम्बार है। समय से अस्पताल न पहुंचना चिकित्सकों व कर्मचारियों का शगल बन चुका है। बुधवार को तो हद ही हो गयी थी जब साढ़े 9 बजे तक भी कोई मुख्य चिकित्सक अपनी चैम्बर में मौजूद नजर नही आया। दोनो मुख्य ओपीडी कक्ष चिकित्सकों के अभाव में खाली पड़े थे। यहां तक कि दवा के काउन्टर पर न फार्मेसिस्ट नजर आये न ही पर्ची काउन्टर पर ह नजर आया। इस स्थिति में सुबह से ही अस्पताल पहुंचे मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर रहे। इस दौरान अस्पताल में में सिर्फ अधीक्षक डा0 जीपी चौधरी ही नजर आये। जब उनसे अस्पताल के इस दुर्व्यवस्था के बावत बातचीत की गयी तो उनका कहना स्पष्ट कहना था कि था कि सभी मनमाने हो गये हैं तथा उनका समय व अस्पताल से कोई मतलब ही नही रह गया है। मरीजो की परेशानी व अस्पताल की दुर्व्यवस्था को देखते हुए जब इसकी बावत दूरभाष से उपजिलाधिकारी राधेश्याम पाठक को अवगत कराया गया तो उन्होने अधीक्षक से तुरंत इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा। एसडीएम का निर्देश मिलते ही अधीक्षक ने उपस्थिति पंजिका लाकर एक सिरे से कर्मचारियों व चिकित्सकों को अनुपस्थित करना शुरू कर दिया तथा अस्पताल में उपस्थित आयुष चिकित्सक डा0 संजय जायसवाल को मुख्य ओपीडी कक्ष व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पर्ची काटने के लिए लगा दिया। अधीक्षक द्वारा कर्मचारियों को अनुपस्थित किये जाने की खबर आग की तरह फैल गयी। खबर मिलते ही अस्पताल के बाहर घूम रहे कुछ कर्मचारी आनन-फानन में वहां पहुंच गये तथा अनुपस्थिति को लेकर अधीक्षक से झड़प करना शुरू कर दिया। उनके इस व्यवहार से ही अस्पताल के कर्मचारियों के अनुशासित होने का भी अन्दाज लोगों को मिल गया। कर्मचारियों विरोध के बावजूद अधीक्षक ने उपस्थिति पुस्तिका की फोटो खींचकर उपजिलाधिकारी को वाट्सऐप के माध्यम से भेज दी तथा सीएमओ से भी बात करने की कोशिश की परन्तु उनका मोबाइल स्विचआफ होने के चलते अधीक्षक की उनसे बात नही हो सकी। इसके बाद कर्मचारियो के शोर शराबे को देखते हुए अधीक्षक ने खुद को कमरे में बंद कर दिया।
तीन माह से जली पड़ी एक्सरे मशीन को कोई पुरसाहाल नही
सीएचसी सीयर का एक्सरे मशीन पिछले तीन माह से जला पड़ा है। इसकी जानकारी जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों को तीन-तीन बार देने के बावजूद स्थिति आज भी ज्यों की त्यों है।

रैबिज इंजेक्शन का अभाव…

पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में रैबिज इंजेक्शन का भी अभाव है। इंजेक्शन के अभाव के चलते आर्थिक रूप् से कमजोर मरीजों की जेब पर इसका काफी बोझ पड़ रहा है। कुत्ता या बंदर के काटे अधिकांश मरीज पैसों के अभाव में इंजेक्शन न लगवा पाने की स्थिति में निजी होम्योपैथिक क्लीनीक से दवा लेकर काम चलाने को मजबूर है।

जीवन रक्षक दवाओं का अभाव…

अस्पताल में पिछले छः माह से जीवन रक्षक दवाओं का अभाव है। किसी भी दुर्घटना में घायल या गंभीर बिमरी से ग्रस्त मरीजों को इलाज के लिए बाहर से खरीद कर लाई गयी दवाओं पर ही निर्भर होना पड़ता है।

दिनभर अस्पताल में निजी पैथालाजी सेंटर के एजेन्ट व एमआर…

निजी पैथालॉजी चिकित्सकों के लिए कमाई का केन्द्र बनते जा रहे है। सीएचसी सीयर में इनके एजेन्ट दिन भर चिकित्सकों के पास मडराते मिलते है। यही नही एमआर भी के लिए अस्पताल में आने जाने का कोई समय निर्धारित नही है।

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