रचनाकार

मऊ में ‘ख्वाबों का सफर’ पुस्तक का विमोचन, डॉ. शकील अहमद आजमी सम्मानित

• साहित्य जीवन को आदर्शपूर्ण बनाने का सशक्त माध्यम : अरशद जमाल

• कवियों और लेखकों की साहित्यिक कृतियों को आगे बढ़ाने के लिए जमाल अख्तर अर्पण ने की अपील

मऊनाथ भंजन। नगर पालिका परिषद मऊ के सभागार में सोमवार को ‘ख्वाबों का सफर’ पुस्तक का विमोचन एवं साहित्यकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर उर्दू साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए वरिष्ठ लेखक एवं शायर डॉ. शकील अहमद आजमी को शॉल और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। साथ ही पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने उन्हें 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की।

‘ख्वाबों का सफर’ पुस्तक दिवंगत कवि माहिर अब्दुल हई अंसारी की गजलों का संग्रह है। उन्होंने मदरसा दारूल हदीस में वर्षों तक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। उनकी साहित्यिक रचनाओं को अधिवक्ता जकी महफूज ने संकलित कर पुस्तक का रूप दिया है। पुस्तक के प्रकाशन में पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल का आर्थिक सहयोग भी रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. दानिश कमाल असरी के परिचयात्मक संबोधन से हुई। उन्होंने दिवंगत कवि माहिर अब्दुल हई अंसारी की साहित्यिक पृष्ठभूमि, उनके शिक्षकों और साहित्यिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. नफीस अब्दुल हकीम और शमीम सादिक ने भी माहिर अंसारी के साहित्यिक सफर और उनकी रचनात्मक प्रतिभा की चर्चा करते हुए कहा कि कम उम्र में ही उन्होंने उर्दू साहित्य में विशिष्ट पहचान बनाई थी।

पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने माहिर अब्दुल हई की गजलों में शब्दों के चयन और उनकी साहित्यिक दृष्टि की सराहना की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन को आदर्शपूर्ण बनाने में साहित्य के योगदान का कोई अन्य विकल्प नहीं है। मऊ जैसे साहित्यिक विरासत वाले शहरों को अपनी पहचान बनाए रखने के लिए साहित्यिक केंद्रों और संस्थाओं से जुड़ना होगा। उन्होंने युवा शोधार्थियों से उर्दू भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

बज्म-ए-तामीर-ए-उर्दू के महासचिव सईदुल्ला शाद, डॉ. शकील अहमद आजमी और गुमान अंसारी ने पुस्तक की साहित्यिक विशेषताओं पर विचार रखे। वहीं अरशद वारसी, शहाब नोमानी और आदिल हेरा ने माहिर अब्दुल हई की गजलें प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

कार्यक्रम के संयोजक गुफरान साजिद ने कहा कि साहित्य समाज को समझने और जीवन को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। वहीं पुस्तक के संग्रहकर्ता जकी महफूज ने प्रकाशन में सहयोग के लिए अरशद जमाल सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को अलग-अलग खांचों में बांटना उचित नहीं है। साहित्यिक और काव्य परंपराएं शिक्षकों से प्राप्त होती हैं, जिन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे एमएए फाउंडेशन के अध्यक्ष जमाल अख्तर अर्पण ने कहा कि क्षेत्र के कवियों और लेखकों की साहित्यिक कृतियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। साहित्यकार समाज के वास्तविक दर्पण और मार्गदर्शक होते हैं। उन्होंने युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उर्दू साहित्य के विकास के लिए उनका फाउंडेशन सहयोग करने को तैयार है।

कार्यक्रम का संचालन जकी महफूज ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, कवि, शिक्षक, उर्दू भाषा के जानकार, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शायर मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *