रचनाकार

लद्युकथा : औरत की जात

शब्द मसीहा…

वह कई दिनों से होटल में रुका हुआ था । दिनभर बाहर रहता। शाम को नॉर्मल खाना खाता और सो जाता । मगर आज रूम सर्विस से उसने बड़ी अजीब मांग की थी ।

“सर! अब हम कहाँ से ढूंढकर लाएँगे इस तरह की लड़की ?”

“यार! कोशिश तो करो , कोशिश करने से तो सब हो जाता है …. रशियन तक मिल जाती है गाजर मूली की तरह ।”

“सर! ये मामला अलग है , आप छोटी जात मांग रहे हैं । फिर भी मैं पूजा शर्मा से पूछता हूँ ।”

उसने तुरंत फोन लगाया और पूछा -“यार कोई , गरीब और छोटी जात का 22 से 24 साल का माल है क्या ? कस्टमर वही मांग रहा है ।”

“हा हा हा ….सालों की जात छोटी है पर नाक बड़ी है , किस्तों में फीस देते हैं, मगर बिकते नहीं है।”

“अरे कोई तो होगी न , बात करो ।”

“मैं ही आ जाती हूँ , औरत की जात कोई समझता तो ऑर्डर ही नहीं करता।” उधर से आवाज आई ।

शब्द मसीहा

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