गाँव को हरा भरा बनाने की युवाओं की पहल, किया पौधारोपण
नगांव/असम। 4 जुलाई 2025 – धूपगुड़ि कचारी गाउं में हरियाली लाने के उद्देश्य से गांव के कुछ उत्साही युवाओं ने एक सराहनीय पहल की है। गांव के खेल के मैदान के किनारे वाली सड़क पर इन युवाओं ने मिलकर पौधारोपण अभियान चलाया, जिसका लक्ष्य गांव को और अधिक हरा-भरा बनाना है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे युवा शक्ति एक समुदाय में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
एक सपना, एक साझा प्रयास…
कचहरी गांव के युवाओं का एक समूह, जो हमेशा अपने गांव के विकास के बारे में सोचता रहता है, उन्होंने महसूस किया कि उनके गांव को और अधिक हरियाली की आवश्यकता है। गांव के खेल के मैदान के किनारे की सड़क, जो अक्सर धूल भरी रहती थी, उनके लिए एक आदर्श स्थान थी जहाँ वे अपने इस सपने को साकार कर सकते थे। इन युवाओं ने आपस में विचार-विमर्श किया और तय किया कि वे खुद इस दिशा में कदम उठाएंगे। उनका मानना था कि गांव में पेड़ों की संख्या बढ़ने से न केवल पर्यावरण स्वच्छ रहेगा, बल्कि यह गांव की सुंदरता में भी चार चांद लगाएगा।
इस पहल में शामिल प्रमुख युवा सदस्य थे अमित सरकार, सुजय राय, कार्तिक सरकार, जयंत राय, सुबीर दास, और मानस सरकार। इन सभी युवाओं ने मिलकर इस योजना को अंजाम दिया। उन्होंने न केवल पेड़ों की व्यवस्था की, बल्कि गड्ढे खोदने से लेकर पौधों को लगाने और उनकी देखभाल करने तक का सारा काम खुद ही संभाला।
अभियान की शुरुआत
शुक्रवार सुबह, सूरज की पहली किरण के साथ ही इन युवाओं का जोश भी परवान चढ़ गया। सभी युवा कचहरी गांव के खेल के मैदान के किनारे वाली सड़क पर इकट्ठा हुए। उनके हाथों में फावड़े, कुदाल और पानी के डब्बे के साथ पौधे थे। सबसे पहले उन्होंने उन जगहों का चुनाव किया जहाँ पौधे लगाए जा सकते थे। फिर, कड़ी धूप और मेहनत के साथ, उन्होंने बड़े-बड़े गड्ढे खोदे।
“हमारा सपना है कि हमारा गांव एक दिन पूरी तरह से हरा-भरा हो जाए,” अमित सरकार ने बताया, जो इस अभियान के सूत्रधारों में से एक हैं। “हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां एक स्वच्छ और सुंदर वातावरण में सांस ले सकें। यह सिर्फ एक शुरुआत है।”
पौधे लगाने से पहले, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मिट्टी उपजाऊ हो और पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त पोषण मिल सके। उन्होंने नीम, पीपल, बरगद, आम और अमरूद जैसे विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए, जो न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं बल्कि पक्षियों को भी आश्रय प्रदान करते हैं।
गांव वालों का समर्थन
जैसे ही युवाओं ने अपना काम शुरू किया, गांव के अन्य लोग भी धीरे-धीरे उनके साथ जुड़ने लगे। कुछ बुजुर्गों ने उन्हें पौधे लगाने के सही तरीके बताए, जबकि कुछ बच्चों ने उत्साह से उनकी मदद की। गांव के एक बुजुर्ग रामेश्वर दास ने कहा, “यह देखकर बहुत खुशी होती है कि हमारे गांव के युवा इतने जागरूक और जिम्मेदार हैं। ये बच्चे हमारे गांव का भविष्य हैं और ये जिस तरह से काम कर रहे हैं, उससे हमें बहुत उम्मीदें हैं।”
गांव की महिलाओं ने भी इस अभियान में अपना योगदान दिया। उन्होंने युवाओं के लिए पानी और जलपान की व्यवस्था की, जिससे उनका उत्साह और बढ़ गया। यह पूरा अभियान एक सामूहिक प्रयास बन गया, जिसमें गांव के हर उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया।
हरियाली का महत्व
इन युवाओं का यह प्रयास केवल पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हरियाली के महत्व को भी दर्शाता है। पेड़-पौधे हमारे पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वे हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिससे हवा स्वच्छ रहती है। पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करते हैं, भूजल स्तर को बढ़ाते हैं और वन्यजीवों को आवास प्रदान करते हैं। इसके अलावा, पेड़-पौधे हमें फल, लकड़ी और औषधियां भी प्रदान करते हैं।
सुजय राय ने इस बारे में बात करते हुए कहा, “आज जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती बन गया है। हम अपने छोटे से प्रयास से इस चुनौती का सामना करना चाहते हैं। अगर हर गांव में लोग इस तरह के अभियान चलाएं, तो हम एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।”
भविष्य की योजनाएं
यह वृक्षारोपण अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक लंबी योजना का हिस्सा है। युवाओं ने यह भी तय किया है कि वे लगाए गए पौधों की नियमित रूप से देखभाल करेंगे। वे पौधों को पानी देंगे, उनकी सुरक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वे ठीक से बढ़ें। उन्होंने गांव के अन्य युवाओं को भी इस पहल में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया है।
कार्तिक सरकार ने बताया, “हमारा लक्ष्य सिर्फ आज पौधे लगाना नहीं है, बल्कि उन्हें बड़ा होते देखना है। हम चाहते हैं कि आने वाले समय में यह सड़क पेड़ों से भरी हो और यहां एक सुंदर और छायादार वातावरण बने।”
इन युवाओं की योजना है कि वे भविष्य में गांव के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी वृक्षारोपण अभियान चलाएंगे। वे स्कूलों, मंदिरों और अन्य खाली पड़ी जमीनों पर पौधे लगाने की सोच रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि वे गांव के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करेंगे और उन्हें अपने घरों के आसपास भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करेंगे।
एक प्रेरणादायक कदम
कचहरी गांव के इन युवाओं का यह कदम पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह दर्शाता है कि कैसे छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। जब युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाते हैं, तो वे न केवल अपने समुदाय का भला करते हैं बल्कि समाज में भी एक नई चेतना जगाते हैं।
इस अभियान ने यह भी साबित कर दिया है कि सामुदायिक भागीदारी किसी भी पहल को सफल बनाने के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। जब लोग एक साथ आते हैं और एक साझा लक्ष्य के लिए काम करते हैं, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं लगती।
पौधा दानकर्ता – गुनोमई बसुमतारी, राकेश बोरो, मोहन बगलारी, परशुराम स्वर्गियारी, आदित्य हज़ुआरी, उत्तम महेला आदि रहे।


