मिसाल-ए-मऊ

मऊ की बेटी का भी योगदान…चांद पर भारत का चंद्रयान

@आनन्द कुमार…

मऊ। बेटियों का भी अपना अलग ही फ़ना होता है वह जब माँ बाप के आँगन में रहती हैं तो मायके का नाम रौशन करती ही हैं, ससुराल जाती हैं तो वहाँ भी नाम रौशन करती हैं और खुशी में उस समय और चार चांद लग जाती है जब यह सफलता जीवन-साथी के साथ मिलती है। इस नाम रौशन में जब बात पूरे रौशन जहां की हो तो क्या कहने।
कल चन्द्रयान 03 की सफलता पर पूरा देश झूम रहा था तो मऊ भी क्यों न झूमें। यहाँ तो बात दोगुनी ख़ुशी की थी। क्योंकि मऊ की बेटी सना फिरोज व गोरखपुर के निवासी उनके पति अम्मार यासिर ने चन्द्रयान 03 में प्रयोग होने वाले कैमरा और सेंसर (चिप और कंडक्टर) बनाया।
मऊ नगर के हसन मक्खा अव्वल बगिया मऊ के फिरोज आलम की पुत्री सना फिरोज शुरू से ही शिक्षा के प्रति जागरूक थी। पढ़ाई उसका जुनून था। हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा डीएवी इंटर कॉलेज मऊ से करने के बाद गोरखपुर के महामना मदन मोहन मालवीय कॉलेज से बीटेक बीटेक की पढ़ाई करने के बाद, कानपुर आईआईटी में एमटेक में प्रवेश लिया। इसी दौरान 2013 में इसरो ISRO में चयन हो गया। गोल्ड मेडलिस्ट सना चंद्रयान-3 में प्रयोग होने वाले कैमरा और सेंसर में मऊ की बेटी और गोरखपुर के दुर्गाबाड़ी रुद्दलपुर की बहू सना फिरोज ने अपने पति अम्मार यासिर के साथ महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही पूरे देश में मऊ का नाम रौशन किया है।
चन्द्रयान 03 की सफलता पर जब पूरा देश टीवी पर चंद्रयान-3 का लाइव कवरेज देख रहा था, तो सना का पूरा परिवार टीवी साथ बैठकर देख रहा था, जैसे ही चन्द्रयान 03 की सफलता की कहानी सना के पिता ने टीवी पर देखी और सुनी तो उनका खुशी के मारे पांव जमीन पर नहीं पड़ा और पूरा परिवार खुशी से चहक उठा। खबर मिलते ही मोहल्ले और पड़ोसी के लोग आकर सना के पिता का मुंह मीठा कराया। पिता ने कहा आज मैं बहुत ही गौरवान्वित हूं।
इस अवसर पर फिरोज आलम, डॉक्टर अशफाक, रशीद अहमद, आबिद यूसुफ और परिवार के अन्य लोग मौजूद रहे।

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