गंगा सिर्फ नदी नहीं
@शालिनी सिन्हा…
गंगा नदी को देवताओं की नदी कहा जाता है। हर शुभ अवसर पर हिन्दुओं द्वारा गंगाजल का उपयोग आम बात है। हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक गंगाजल की अहम भूमिका होती है। आज लगभग हर हिंदू के घर में गंगाजल होता ही है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार कहाँ जाता है कि भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाना चाहते थे। क्योंकि एक श्राप के कारण केवल मां गंगा ही उनका उद्धार पर सकती थीं। अतः उन्होंने मां गंगा की कठोर तपस्या की और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए। तब भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की। फिर गंगा ने कहा मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरी तेज धारा धरती पर प्रलय ले आएगी। जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। माना जाता है मां गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके। उसके बाद नियंत्रित वेग से गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियां प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाई।
आज 2510 कि. मी. में फैली भारत की सबसे लंबी नदी गंगा है। यह पृथ्वी पर हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र नदी है। इसका विस्तार भारत के अलावा चीन(तिब्बत ),नेपाल, बांग्लादेश में है।

यह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश तथा केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली को कवर करती है, जिसका क्षेत्रफल 8,61,452 वर्ग किमी. है,जो लगभग देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 26% है।यह हिमालय में गंगोत्री हिमनद के हिम क्षेत्रों से निकलती है।
इसे उद्गम स्रोत पर भागीरथी कहा जाता है। यह घाटी से नीचे देवप्रयाग तक बहती है जहाँ एक अन्य पहाड़ी नदी अलकनंदा से मिलती है, फलस्वरूप इसे गंगा कहा जाता है।
यह तो हुई गंगा से सम्बंधित कुछ फैक्ट्स जो अमूमन सामान्य ज्ञान के तहत सभी को पता है परन्तु आज हम उन शोधों की चर्चा करेंगे,जिससे यह साबित होता है कि गंगा का पानी शुद्ध ही नहीं है बल्कि कई चत्कारिक गुणों से युक्त है। गंगा के पानी में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जिनमें औषधीय गुण पाया जाता है। इसी वजह से गंगाजल कभी खराब नहीं होता। गंगाजल कई तरह के संक्रमण के इलाज में उपयोग में अब लाया जा सकेगा ।यहां तक कि यह कई एंटीबायोटिक दवाओं से भी ज्यादा कारगर होगा । ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के रिसर्च में रिसर्चरों ने पाया कि गंगाजल में पाए जाने वाले बैक्टीरिया तमाम तरह के संक्रमण के इलाज में मौजूदा उपलब्ध एंटीबायोटिक की जगह ले सकते हैं। यूरिन इन्फेक्शन, गंभीर बर्न इंजरी, सर्जरी के दौरान लगे कट, निमोनिया,लंग इन्फेक्शन, डायबिटीज जैसे इन्फेक्शन में गंगाजल कारगर साबित हो सकता है। एम्स के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च के दौरान गंगाजल में एक ऐसे बैक्टीरिया का पता चला जिसका डीएनए ड्रग-रेजिस्टेंट इन्फेक्शन का इलाज कर सकता है। डिपार्टमेंट ने इस बैक्टीरिया को ‘सूडोमोनस एरुजिनोसा’ नाम दिया है।
एक अन्य शोध के अनुसार, अन्य नदियों की तुलना में, गंगा की रेत में तांबे, क्रोमियम और रेडियोधर्मी थोरियम की ट्रेस मात्रा अधिक होती है। ये तत्व गंगाजल में पत्थरों की रगड़ से उत्पन्न कीटाणुओं को नष्ट कर सकते हैं। शोध में यह भी कहा गया है कि गंगाजल में कलीफा नामक उपयोगी जीवाणु पाया जाता है, जो हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट कर जल को शुद्ध करता है। इसके साथ ही लखनऊ के राष्ट्रीय वनस्पति संस्थान ने अपने शोध में बताया है कि गंगाजल जहरीले ई.कोलाई/E. Colai बैक्टीरिया को भी नष्ट कर सकता है। गंगाजल का यह चमत्कारी गुण इसकी तलहटी या सतह पर है। जब वैज्ञानिकों ने गंगा जल में हानिकारक रोग कारक कीटाणु मिलाए तो पाया कि गंगा जल के प्रभाव से सारे कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
शालिनी सिन्हा
पूर्व-रिसर्च एसोसिएट
केन्द्रिय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ
गेस्ट फैकल्टी
एज़ाज़ रिज़्वी कॉलेज ऑफ जॉर्नलिज्म
एवं फ्रीलान्स लेखिका

