पुण्य स्मरण

“जार्ज” होना आसान नहीं…

@ आनन्द कुमार…

नेता बनना तो आसान है लेकिन जार्ज बनना मुश्किल, एक ऐसा नेता जो सत्तारूढ़ सरकार की चूलें हिला देता था, सरकार इतना कांपती थी की ऐसे मजदूर व सच्चे समाजवादी नेता को हथकड़ी व जंजीर लगाकर गिरफ्तार करती थी। आज ऐसे नेताओं की संख्या शून्य सी है, जो जनता के लिए आंदोलन कर सके। अबके नेता संवेदनहीन व संवेदनशून्य से हैं उन्हें जनता के दर्द व संवेदना से कोई लेना-देना नहीं है। वे धर्म जाति की राजनीति में उलझे हैं और कैसे कुर्सी पायें इसी में सुलझने व सुलगने का प्रयास करते हैं। आज कोरोना वायरस के वैश्विक महामारी में जार्ज फर्नांडीज जैसे सरीखे नेता की सख्त आवश्यकता थी। अगर आज जार्ज होते तो सरकारें, कम्पनी, कारखाने व उद्योग वाले मजदूरों के साथ लाकॅ डाउन की अवधि में उनकी आवश्यकताओं की अनदेखी नहीं कर पातें। सरकार कोई भी हो चाहे गद्दी पर बैठने वाला कितना भी ताकतवर क्यों न हो जार्ज फर्नांडीज से वह कांपता जरूर था।
जार्ज जी अब आप दुनिया में नहीं हैं लेकिन आपकी यादें अविस्मरणीय हैं। आपको भारत की वर्तमान पीढ़ी भले देख व सुन नहीं पायी लेकिन आपको पढ़कर जरूर वे आपके सपनों के भारत की कल्पना करेगी। आपको पढ़ेगी तो इंदिरा गांधी, राजीव गाँधी, अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे नेताओं को भी पढ़ेगी, वे वर्तमान के नरेन्द्र मोदी सरकार को भी पढ़ेगी और उनका कार्य को देखकर कुछ अपने मन की गढ़ेगी। भारत आपको याद करता रहेगा। हे देश के मजदूरों, मजलूमों के जननायक हम नतमस्तक हैं आपके देश के प्रति धर्म व कर्म पर।

जार्ज सचमुच अपने समाजवादी सोच की बदौलत देश में जो अपने पहचान बनाई थी वह पहचान हर व्यक्ति के अंदर हर व्यक्तित्व के अंदर होना मुश्किल है। जार्ज एक नाम ही नहीं था बल्कि एक सोच था। जार्ज एक मुकाम था, जार्ज एक मंजिल था। जार्ज होना इतना आसान नहीं है। जार्ज को लोग यूं ही नतमस्तक होकर पूजते नहीं है, जार्ज में कुछ तो ऐसा था जो औरों में नहीं है। इस महान नेता से सत्ता को इतना डरता कि जब वे गिरफ्तारियां करती थी तो बिना हथकड़ी के जार्ज को गिरफ्तार नहीं करती थी। क्योंकि यह जार्ज सरकार की चूले हिलाता था, इस जार्ज से सरकार की कुर्सी डोलने लगती थी, जार्ज सरकार को झुकने पर मजबूर करता था। ऐसे नेता को बार-बार नमन् और नतमस्तक।

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