नया कार्यक्रम : आओ कविता पढ़े-भाग- एक, बाल साहित्यकार ध्रुव सिंह

डॉ महिमा सिह एक शिक्षिका भी है। वो बच्चों की हिंदी की कक्षाएं भी संचालित करती है । इसी दौरान उन्होंने महसूस किया की आज कल के पाठ्यक्रम मे कविताओ का स्तर कुछ अजीब और स्तरहीन सा है फलस्वरूप मन मे विचार आया कि क्यू न कुछ ऐसा किया जाए जिससे बच्चों में हिंदी साहित्य के प्रति रुचि जगाई जाए और उन्हें काव्य जगत से जोड़ा जा सके और उनकी रुचि कविता पाठन और लेखन में बढ़ायी जा सके। परिणामस्वरूप उन्होंने लखनऊ की सरिता त्रिपाठी के पटल पर यह कार्यक्रम करने का प्रस्ताव रखा वो सहर्ष तैयार हो गयी और परिणाम आपके समक्ष है। आओ कविता पढ़े भाग – 1 में हमारे पहले नन्हे मेहमान कलाकार बने ध्रुव सिंह जो कक्षा-6 के विद्यार्थी है और चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। उनकी माता डा० मंजू भी एक कवियत्री है।
ध्रुव के साथ पटल पर बात करके बहुत अच्छा लगा और ध्रुव की सरलता और हाजिरजबाबी ने श्रोताओं का भी मन मोह लिया। ध्रुव को चपाती बनाना सैडविच बनाना अच्छा लगता है उन्हें उनकी माँ इस दुनिया में सबसे प्रिय है। ध्रुव सिंह ने पहली कविता जो उन्होने अपनी माँ के लिए स्वयं लिखी थी अपनी माँ को समर्पित करते हुए सुनाई ।
घूमती है मेरे इधर-उधर जो रखती मेरा ध्यान है करती हैं जाने कैसे सब हम सबको उस पर मान है मेरी गीता मेरी कुरान है मां मेरी भगवान है।
फिर ध्रुव ने बताया कि कभी कभी वह समाचार पत्रों में
भी कविता पढ़ते हैं।
सरिता जी ने भी ध्रुव से बात की और उसे कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई। फिर इसी क्रम में दूसरी कविता जो उनकी माँ ने उनके लिए तब लिखी थी जब उन्हें,
मुहावरे नही याद हो रहे थे सुनायी
- हिन्दी
भाषाओं में प्यारी हिंदी
देश की है माथे की बिंदी
बोली एकदम ये बेजोड़
हर प्रोब्लम का इसमें तोड़
दाल रोटी की इसमें बात
फल फूल भी हरे भरे
अलग अनोखी बात सभी की
अलंकार, संधि या मुहावरे
दिल पर कहीं हैं साप लौटते
आंगन कहीं पे टेड़ा है
पश्चिम से सूरज उग जाए
जहां जागो वहीं सबेरा है
राई को चाहे पहाड़ बना लो
चाहे तिल का ताड़ बना लो
जो न माने बात तुम्हारी
उसको लोहे के चने चबा दो।
.ध्रुव ने बताया कि उन्हें पहले तो थोड़ा डर लगा पर जल्दी ही उन्हें अच्छा लगने लगा और कार्यक्रम से जुड़कर प्रसन्नता महसूस कर रहे है। सरिता त्रिपाठी जी ने सुबह जल्दी उठना और समय से सारे काम करने के लाभ बताए।
अब ध्रुव ने बूंद के ऊपर अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी की कविता सुनायी जो उन्हें अच्छी लगती है।
बीच- बीच में ध्रुव ने सरिता जी से और डाक्टर महिमा सिंह जी से बहुत सारी बातें की और क ई बाल सुलभ प्रश्न भी पूछे।
मंच और श्रोता सभी मुस्कुरा उठे।
इस कार्यक्रम के द्वारा बच्चों को हिंदी साहित्य से जोड़ना और भविष्य मे उन्हे पठन पाठन के लिए प्रेरित करना है । जो भी इस कार्यक्रम में बच्चो को प्रतिभागी बनाना चाहता है वो सरिता त्रिपाठी या डा० महिमा सिंह से फेसबुक मैसेंजर पर संपर्क कर सकता है।( लिंक संलग्न) ध्रुव से यह वादा लिया कि अब वो जो भी अच्छा काम करें तो हमसे उसे सांझा अवश्य करें हम उसे पटल पर पोस्ट करेंगे।
भविष्य मे जब भी वो अपनी नयी कविताएं लिखे तो हम उन्हें फिर से कार्यक्रम में आमंत्रित करेंगे।
आप सभी का सहयोग अपेक्षित है । बच्चों के इस कार्यक्रम से जुड़े और उन्हें जोड़ें।
आओ नौनिहालों में भरें भावो का रस ,
करें हृदय से चिंतन, करें शब्दों का वो मंथन और करें नए काव्य का सृजन आओ जगाए सोता बचपन
आओ तराशे मिलकर भविष्य के साहित्य के सुनहरे मोती।
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