रचनाकार

रचना : मेरे ख्वाब

@ डा. महिमा सिंह, चेन्नई, तमिलनाडु…

मेरे ख्वाब भी
अब नहीं मेरे
ऐसी भी कहीं
राह जनी होती है
वह भी दिनदहाड़े।
तुम ख्वाबों में हीं
तो मेरे थे। अब वह
भी नहीं रहा मेरा
डाका डालना ही था,
तो कहीं और डाल लेते
दिल तो छीना ही था
आज ख्वाब भी ले गए तुम
चलो अच्छा है यादें
किसी और की होती हैं,
पर होती तो अपनी है ।
उस पर डाका चाह कर
भी नहीं डाल सकते तुम।
तुम से भी ज्यादा
अजीज है मुझे
तुम्हारी यादें क्योंकि
इनको मैं जब चाहे
तब बुला लेती हूं
जब चाहे तब
इनके संग मुस्कुरा लेती हूं
तेरे ना होते हुए भी
यह मुझे तेरे होने
का एहसास दिलाती है
यही मेरी जीवन की
जमा पूंजी है
करी है इन की
वसीयत बड़े जतन से
तू जो गर लेना चाहे तो आकर मेरी धड़कने लौटा दे
आंखों में जो तेरी
तस्वीर बसी है
उसमें रंग भर दे
जी लूंगी एक लम्हा
जो तुझे देखकर
तो फिर उसी लम्हे
सारी जायदाद
तेरे नाम कर दूंगी।
है जलन इन हवाओं
से मुझे यह रोज
तेरे दर जाकर
तुझे छुकर आती हैं
और मुझे हंस हंस
के सताती हैं ,
मेरी बेबसी को
और बढ़ा देती है।
तेरे ख्यालों की धूप
से जो लगन है मुझे
उसी की गुनगुनी
धूप में जी रही हूं।
मैं अधूरी होकर
भी पूरी सी मैं।
अब ना ख्वाब
भी देख पाऊंगी
तेरे! क्या जरूरी था
तेरा डाका डालना
आना ही था
तो मिलने के लिए
आते जिससे ख्वाबों
को नए हसीन मंजर
तो मिल जाते ।
तेरी यादें ही
परछाई बनकर मेरे
साथ हर घड़ी
साथ निभाए हैं मेरा।
लिया है सात फेरा
मैंने तेरी हसीन
यादों के संग
अब है तेरी यादें ही
मेरे सिन्दूर की आभा
तू आए या ना आए
तेरी यादें
मेरा साया
मेरा हमसफ़र।

@ डाक्टर महिमा सिंह का परिचय…
लखनऊ की पली बढ़ी IT कॉलेज से स्नातक, कानपुर विश्वविद्यालय से परास्नातक (भूगोल एवं अंग्रेजी साहित्य में) एवं भूगोल मे Ph.D हैं। अनेकों संगोष्ठी में प्रतिभागिता और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्तित्व की महिला हैं, जो कि कई सामाजिक कार्य से जुड़ी हुई हैं। केयर फार नेचर ऑर्गेनाइजेशन की फाउंडर मेंबर भी है।
3 एकल काव्य पाठ, कई गोष्ठियों का संचालन ,कई गोष्ठियों में भाग ले चुकी है और लेती रहती है।
उन्हें अपने पति के स्थांतरित होने वाले कार्यशैली से बहुत प्रसन्नता है जो कि मैने बहुत ही कम लोगों से सुना है। उसका कारण है डॉ महिमा को भ्रमण का शौक है और वह नये जगह के आस पास के प्रकृति और इतिहास को घूमकर समझ पाती हैं, और उससे कुछ न कुछ सीखती रहती हैं। उनके दो प्यारे प्यारे बच्चे हैं और वह हिंदुस्तान को पूर्णतया देखना चाहती हैं। उन्हें कविता लिखने का शौक बचपन से ही था, जो कि
किताबें पढ़ने की रुचि के कारण और बढ़ता गया। वह एक कुशल गृहणी हैं और बहुत ही साफ दिल की हैं जो उनके व्यक्तित्व और आस पास सदा घिरे हुए परिवार एवं दोस्तों से दिखता रहता है। वह जमीन से जुड़े रहना चाहती हैं और जहाँ तक हो सके किसी को उनसे दुःख न पहुँचे बस यही उनका प्रयास रहता है।

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