मिसाल-ए-मऊ

मऊ के अजीत सिंह ने शिक्षा की बदौलत बदल डाली परिवार की तस्वीर,आज होते हैं चर्चे

मऊ। कुछ अलग करने का इरादा हो, मन में जुनून सवार हो कि हमें अपने लिए ही नहीं परिवार व समाज के लिए भी कुछ करना है। हर धुंधली उस तस्वीर को बदलने की नियति हो कि जिन अभावों में मैं जिया उनमें बच्चों को नहीं जिने देंगे तो रास्ते में आने वाली ठोकरें भी बुलन्द हौसलों से टकरा कर दूर छिटक जाती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी एक शख्स ने अपने मन में रची और चल पड़े उस ओर उसे पूरा करने के लिए लक्ष्य को लेकर। और तब तक चलते रहे जब तक अपनों को वह मंजिल नहीं मिल जाती, वह शोहरत नहीं मिल जाती। आर्थिक अभाव जिएं जिन्दगी से छुटकारा नहीं मिल जाती। और उस शख्स को यह सब पाने में कुछ साल तो जरूर लगे लेकिन सब पाया एक सोच की बदौलत, जिसका नाम है शिक्षा। पढ़ाई के दौरान ही शिक्षा के मोल को समझ शिक्षा को जुनून बना लिया और शिक्षा से ही सारी मंजिल। जबकि आज 60 वर्ष की उम्र के करीब पंहुच रहे अजीत सिंह का काम करने का इरादा वही 25 साल की अवस्था वाली है।
जी हां शिक्षा की अलख जगाकर अभाव की जिन्दगी जिने वाले अजीत सिंह ने अपनी ही नहीं अपने आगे की पीढ़ियों की तस्वीर बदल दी। जिनके सोच के आगे लोग नतमस्तक हैं।

#अजीत सिंह

यह कहानी है महर्षि बाल्मीकि की तपोस्थली, उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के छोटे से गांव रायपुर की। छोटे से किसान परिवार जमुना सिंह के घर में जन्में अजीत सिंह,चार भाई और एक बहन में सबसे छोटे हैं। मामूली सी कृषि योग्य भूमि के साथ पूरे परिवार का जीवन यापन उसी पर निर्भर था, जो उनके परिवार के लिए अभाव व दिक्कतों से कम नहीं था। गांव में स्कूल न होने की वजह से प्रारंभिक शिक्षा गांव से 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, आने-जाने का कोई संसाधन नहीं क्योंकि उन दिनो जिसके पास साइकिल होता था उनकी गिनती धनवान में होती थी। शुरू से पढ़ने में मेधावी अजीत सिंह मिडिल स्कूल बोर्ड की कक्षा 8 की परीक्षा में तबके पूरे आज़मगढ़ जनपद में टाप किये थे। पुनः यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में टॉप 10 की सूची में शामिल थे। गुरुजनों ने उनकी प्रतिभा की कहानी उनके कक्षा आठ के परिणाम आने के बाद ही गढ़नी शुरू कर दी थी। लेकिन घर की वित्तीय स्थिति खराब होने की वजह से बड़े भाई की तरह उन पर भी परिवार का दबाव खेती करने का बनने लगा। लेकिन कृषि योग्य भूमि का अभाव, पैसे की दिक्कत, पिता व तीन भाईयों का पहले से कृषि कार्य में होना, और अजीत सिंह के मन में शिक्षा की बदौलत कुछ अलग करने का जज्बा सब बेमेल था। लेकिन हिम्मत था तो आगे बढ़ना था, कुछ अलग करना था। सबके मना करने बावजूद अजीत सिंह ने उच्च शिक्षा के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में स्नातक विज्ञान विषय करने के लिए प्रवेश लिया। आईटी बीएचयू से एमटेक में परास्नातक की उपाधि ली। अजीत सिंह का शुरू से ही मन समाज के लिए कुछ करने का बना रहा। इसलिए वह चाहते थे कि किसी ऐसे क्षेत्र में काम करें कि समाज से जुड़ सकें। लेकिन वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से इन्होंने नौकरी शुरू कर दी। उधर उनके बड़े भाई रामअवध सिंह और राम बचन सिंह खेती करते थे और जयप्रकाश सिंह ग्राम विकास अधिकारी बनकर परिवार को कुछ संबल प्रदान करने लगे। लेकिन बड़ा परिवार छोटी सी खेती और बहुत साल बाद भाई की नौकरी से घर चलाना आसान नहीं था। अजीत सिंह ने उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के संस्थान झांसी में काम किया। फिर उन्होंने एमइसीएल भारत सरकार के लिए काम किया। सन् 2002 में भूमंडलीकरण के दौर में उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और निजी संस्था (प्राइवेट कंपनी) से जुड़े‌। भारत के पश्चिमी देशों और पूर्वी देशों में जाकर नवीनतम तकनीकी सीखा और उसके आयाम भारत में स्थापित किया। उन्होंने यूएस, आस्ट्रेलिया ब्रिेटेन, चाइना, मलेशिया, इनडोनेशिया व सिंगापुर आदि तमाम 10 देशों में काम किया।

अजीत सिंह के परिवार की दूसरी पीढ़ी जो अलग अलग क्षेत्र में कर रहे मऊ का नाम रौशन

उपलब्धियां…
आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आप तमाम देशों में भ्रमण और गांव से बाहर रहकर भी हमेशा अपनी जन्मभूमि मऊ से जुड़े रहें। परिवार की दूसरी पीढ़ी को अपने मार्गदर्शन में शिक्षा का महत्व समझाकर अलग अलग क्षेत्रों में स्थापित कराना। और जन्मभूमि के मोल को भी समझाते रहे।

आपके ही विशेष मेहनत से परिवार में चार भाइयों और एक बहन के बाद वाली पीढ़ी में 7 लड़के हुए और सभी अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

संजय सिंह – सबसे बड़े बेटे अगली पीढ़ी के इन्होंने बीए व आईटीआई करने के उपरांत निजी कंपनी में काम करते थे। लेकिन घर पर बड़े पिताजी व चाचाजी और सदस्य का स्वास्थ्य ठीक ना होने के चलते बड़े होने के नाते नौकरी छोड़कर बुजुर्ग लोगों की सेवा और कृषि करने का निर्णय लिया और गांव में रहते हैं।

अजय सिंह- आप पेशे से जियोलॉजिस्ट हैं अभी निजी संस्थान एस्सार आयल में (डीजीएम) डिप्टी जनरल मैनेजर हैं।

अभय कुमार सिंह-आप पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। अभी निजी संस्था HCLमें मैनेजर हैं। आप अमेरिका में नौकरी करते थे लेकिन माता पिता की सेवा से बड़ी और कोई नौकरी नहीं, ऐसा सोचते हुए वापस आ गये, और नोएडा में माता-पिता के साथ रहते हैं।

आलोक सिंह -आप भारतीय रेलवे के बेंगलुरू डिवीजन में रेल प्रबंधक के रूप में सेवारत हैं।

प्रशांत सिंह – पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। आप खुद की संस्था चलाते हैं। आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करते हुए 15-20 लोगों को रोजगार दिए हुए हैं।

संतोष सिंह -आप भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट अधिकारी हैं।

मनोज सिंह – आप पेशे से इंजीनियर है व आटो मोबाइल क्षेत्र में है एरिया मैनेजर हैं।

अजीत सिंह ने शिक्षा को इतना महत्व दिया कि परिवार ही नहीं समाज में भी आसपास के लोगों को प्रोत्साहित एवं मार्गदर्शन करते हैं। कहा कि शिक्षा से ही समाज में जाति या धर्म से आगे निकलकर लोगों से जुड़े रहते हैं। विनम्रता और संस्कार के वजह से ही गांव के लोग आज भी इन्हें “बाबू”कह कर बुलाते हैं। जब भी किसी शहर में जाते हैं वहां अपने गांव के आसपास के पढ़ रहे या नौकरी कर रहे बच्चों से जरूर मिलते हैं।
अजीत सिंह की इस कहानी से यही निष्कर्ष निकलता है कि शिक्षा सबसे बड़ी चीज है और शिक्षा के साथ आप परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाते रहे। शिक्षा ही आप को, समाज और परिवार की जिम्मेदारियों का बोध कराती हैं। शिक्षा से ही आदर्श समाज की परिकल्पना की जा सकती हैं। अजीत सिंह के मन में मऊ के लिए कुछ बेहतर करने की कई योजनाएं हैं जिसको जीवन्तता देना बाकी है।

2 thoughts on “मऊ के अजीत सिंह ने शिक्षा की बदौलत बदल डाली परिवार की तस्वीर,आज होते हैं चर्चे

  • Vipin Agarwal

    He is a great man and absolutely an example to the new generation as to how one can reach on heights and can remain attached to the ground.

    Reply
  • Ajit Singh

    Thank you so much for your kind words in my praise Vipin Agarwal Ji.. 🙏🙏
    Get Well Soon..

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *