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विक्रांत सिंह रिशु ने रचा इतिहास, भाजपा-सपा के दिग्गज को हराकर निर्दल पंहुचे सदन

आनन्द कुमार…

मऊ। आजमगढ़ – मऊ स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य के प्रत्याशी के रूप में निर्दल चुनाव लड़ रहे विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह के बेटे विक्रांत सिंह रिशु ने निर्दल चुनाव जीत कर न सिर्फ इतिहास बनाया है बल्कि इस चुनाव में दो बड़े राजनीतिक दलों तथा दो राजनीति के धुरंधर खिलाड़ियों को ऐसी पटखनी दी है जो मऊ आजमगढ़ के राजनैतिक इतिहास में याद रखा जाएगा। जिला पंचायत सदस्य से सीधे विधानसभा के उच्च सदन में पंहुचने वाले विक्रांत सिंह रिशु अब अपने पिता यशवंत सिंह के साथ-साथ सदन में बैठेंगे। इतना ही नहीं विक्रांत सिंह रिशु यह सीट न सिर्फ आजमगढ़ से छिनने में कामयाब रहे बल्कि इस सीट पर मऊ का प्रत्याशी जीता है यह भी गौरव प्राप्त किया है। साथ ही यह भी सिद्ध कर दिया कि वे आजमगढ़ और मऊ जनपद की राजनीति में उभरता चेहरा हैं। और राजनीति के इस खेल में उनके पिता यशवंत सिंह किंगमेकर हैं।

आज मंगलवार को सम्पन्न हुए मतगणना में विक्रांत सिंह रिशु ने भाजपा प्रत्याशी व सपा विधायक रमाकांत यादव के पुत्र पूर्व विधायक अरुण कान्त यादव को दी करारी शिकस्त दी। निर्दल प्रत्याशी विक्रांत सिंह रिशु को कुल मत 4075 वोट मिला। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी अरूण कांत यादव को 1262 मतों से ही संतोष करना पड़ा। सपा प्रत्याशी वर्तमान में इस सीट पर एमएलसी राकेश यादव की जमानत जप्त हो गई। राकेश यादव को मात्र 356 वोट ही मिल सका। इस प्रकार निर्दल प्रत्याशी विक्रांत सिंह रिशु ने भाजपा प्रत्याशी अरुण कांत यादव को 2813 मतों से करारी शिकस्त दी।


बताते चलें कि निर्दल विधान परिषद के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए विक्रांत सिंह रिशु के पिता एमएलसी यशवंत सिंह को इसी चुनाव के चलते भाजपा से निष्कासित किया गया था। जबकि यशवंत सिंह वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी विधान परिषद सीट छोड़े थे और पार्टी के साथ पूरी आस्था के साथ काम करते आ रहे थे। जबकि उन्होंने भाजपा से बेटे के लिए टिकट मांगा पर भाजपा ने उन्हें इस योग्य न समझा। इस सीट के लिए वर्षों से तैयारी कर रहे विक्रांत ने जीत कर अपना लोहा मनवाया है। अब देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी यशवंत सिंह को भाजपा ने पार्टी विरोधी गतिविधि के चलते भारतीय जनता पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया था, उन्हें पार्टी में शामिल कराती है या नहीं। और उनके बेटे को भी भाजपा में आने का न्योता देती है या नहीं। या फिर यह देखना होगा कि बाप बेटे का अगला राजनीतिक स्टंट क्या होगा। लेकिन इतना तो तय है कि पिता-पुत्र ने मऊ जनपद ही नहीं आजमगढ़ जनपद के राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा तो करा ही दी की, यशवंत राजनीति के खिलाड़ी हैं और उन्होंने अपने पुत्र को विधान परिषद के सदस्य के रूप में किसी पार्टी के सहयोग से नहीं बल्कि अपने राजनैतिक कौशल से विधान परिषद सदस्य के रूप में जिताया है। यह नेताओं को स्वीकार करना ही होगा। हिन्दुस्थान समाचार/आनन्द कुमार

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