रचनाकार

कविता : आज फिर एक नई शुरुआत करते है

रंजना यादव

@ रंजना यादव, बलिया से…

चलो आज फिर एक नई शुरुआत करते है
देर हो चुकी है बहुत
पर आज से ही कल का आगाज करते है

मिलो पीछे ठहरने वाले
आज आगे निकल चुके है
जो पुछा करते थे किताबो के सवाल ……कभी मुझसे
आज वो नवाब बने फिरते है
देर हो चुकी है बहुत
पर आज से ही कल का आगाज करते है

सपना बुलंदियो को छूने का ….. कभी रहा ही नही
मुझे तो ज़मीन की गोद मे ठहरना था
चलना था मिलों दूर तक मुझे
करना था बहुत कुछ सफर में ……
पर पैसे कमाने की दौड़ में
ये कहाँ आ गये हम

देर बहुत हो चुकी है
पर आज से ही कल का आगाज करते हैं हम

भटके हुये को रास्ता दिखाना चाहते थे पर
समाज के जन्जाल में खुद ही फंस गये हम
रितियों की बेड़ियो में कुछ ऐसे बँध गये हम
खुद के उम्मीदों का गला घोटते रहे हम

एहसास है मुझे
देर बहुत हो चुकी है
पर आज से कल का आगाज करते हैं।

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