कोई “खुल” कर तो कोई “दबी जुबां” कर रहा “दारा” के फैसले का विरोध

@आनन्द कुमार मऊ से…
मऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी तापमान की तपिश मऊ जनपद में भी फैलती जा रही है, कारण साफ है, भाजपा छोड़ गये दारा सिंह चौहान का मऊ जनपद से राजनीति का नाता है, और सियासत की खेतीबाड़ी भी यहीं से है। राज्यपाल को भेजे इस्तीफे में दारा सिंह चौहान ने लिखा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में वन पर्यावरण और जन्तु उद्यान मंत्री के रूप में मैंने पूरे मनोयोग से अपने विभाग की बेहतरी के लिए कार्य किया, किन्तु मौजूदा सरकार पिछड़ों, वंचितों, दलितों, किसानों और बेरोजगार नौजवानों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के साथ-साथ पिछड़ों और दलितों के आरक्षण के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे आहत होकर मैं उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रहा हूं।

दारा के इस फैसले के बाद और 2022 में इस्तीफे के दौर के चलन में यूपी की सियासत का बाजार तो गर्म है मऊ भी इससे अछूता नहीं है।
दारा सिंह चौहान के इस फैसले पर, कोई “खुल” कर तो कोई “दबी जुबां” विरोध करने लगा है। वहीं बहुतेरों की माने तो “दारा” के जिन्दाबाद करने में उनका राजनैतिक कैरियर तबाह होने के मुहाने पर है। इसलिए कुछ खास समर्थक जो उनके साथ बसपा से BJP में आए थे वो दारा के भाजपा छोड़ने के बाद भी खुद को भारतीय जनता पार्टी में बने रहने की बात कर रहे हैं और अपने ही नेता दारा सिंह को बॉय बॉय कर रहे हैं। वे दारा के इस फैसले से नाखुश हैं। वहीं गैर भाजपा के लोग दारा का भाजपा से किनारा बनाने पर बेहद खुश हैं उनकी माने तो आखिर कोई कब तक दम घोंटू जगह पर रहेगा। इस मामले में मऊ की राजनीति से जुड़े लोगों की जो प्रतिक्रिया आई है वह कुछ यूं है…
नेता कहिन…

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय दो टूक में कहते हैं ‘जब भाजपा किसी दल के नेता को अपने दल में शामिल करती है तो वो उस समय उनके लिए “सोना” होता है, और जब वही नेता अपना जौहरी बदल लेता है तो भारतीय जनता पार्टी के नजरिए में ऐसे लोग “लोहा” हो जाते हैं। भाजपा को अपनी ये सोच बदलनी होगी। हर आदमी उगते सूर्य को नमन् करता है और भाजपा का सूर्य अस्त हो रहा है।

लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा के युवा नेता बजरंगी सिंह बज्जू कहते हैं “जबतक गाड़ी, बंगला सरकारी थी, तब तक इनको भाजपा प्यारी थी। पांच वर्ष जलालत सहते रहे, इनका समाज को ठगते रहे। बड़ा सब्र है!
कहा कि इनके रंग से गिरगिट भी शरमा जाए। जिस समाज का यह रोना रो रहे हैं वह सब समाज 2014 से भाजपा के साथ है, समाज इनके साथ रहता तो ये बसपा से हारते नहीं। जिनको यह पिछड़ा-पिछड़ा कह रहे हैं असल में वह इनका परिवार पिता और पुत्र है। इन अवसर वादियों के जाने से भाजपा पर कोई फर्क नही पड़ता, मऊ में भाजपा चार विधान सभा जीतेगी और जहां-जहां ये बगावती जोश में सारी खेती अपनी बता रहे हैं, वैसे ही जैसे गांव में दहेज लोभी इशारे में लड़की वालों को हाथ घुमाकर बताते हैं, सारा खेत अपना है और होता कुछ नहीं है। वही हाल इनका है। भाजपा पुन: आ रही है और यही जय भाजपा और जनता की तय भाजपा है।

दारा सिंह चौहान के करीबी भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक समाज के नेता डॉ. शाहनवाज ने कहा कि वे पूरी ईमानदारी से भाजपा के साथ हैं और उसकी नीतियों पर विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि दारा सिंह चौहान का भाजपा से जुदा होने का फैसला उनकी अपनी निजी हो सकता है। वे उनके विचार से कतई सहमत नहीं है। वे 2022 में पुन: कमल खिलाने के लिए और योगी जी को दुबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए जी जान से पार्टी के लिए कार्य करेंगे।

मऊ नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन व सपा नेता अरशद जमाल कहते हैं “जहां दम घुटे वहां नहीं रहना चाहिए। दारा सिंह चौहान नोनिया समाज के बड़े नेता है, उनको भाजपा ने कभी सम्मान नही दिया। अगर मंत्री जी समाजवादी पार्टी में आते है तो उनका स्वागत है।

भाजपा ओबीसी मोर्चा गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री संतोष चौहान कहते हैं जो भाग के आया है वो भाग के जाएगा। मौसम विज्ञानी दलबदलू नेता कभी चौहान समाज का हितैषी नही हो सकता। मऊ का चौहान समाज अपनी आन बान शान के लिए भाजपा को 2017 से भी प्रचंड बहुमत और विजय के लिए वोट दिया था और 2022 में भी करेगा। अवसरवादिता की राजनीति करने वाले 2022 के चुनाव में ऐसी पटखनी खाएंगे जो वे सोचे नहीं होंगे।

भाजपा के जिला उपाध्यक्ष आनन्द प्रताप सिंह ने कहा कि दारा सिंह चौहान सरकार में महत्वपूर्ण विभाग के कैबिनेट मंत्री थे। उन्हें यह बात शोभा नहीं देता कि वे कहे भाजपा में पिछड़ों व दलितों के साथ अन्याय हो रहा है। जबकि मुझे गर्व है हमारे देश के पीएम मोदी पिछड़े वर्ग से, राष्ट्रपति कोविंद दलित वर्ग से आते हैं। भाजपा का ही इतिहास है कि अल्पसंख्यक वर्ग से महान वैज्ञानिक भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया। देश के अन्य प्रदेशों में सभी समुदाय से मुख्यमंत्री, राज्यपाल तमाम संवैधानिक पदों पर लोग आसीन हैं। भाजपा सबका साथ सबका विकास के नारा के साथ चलती है और आगे भी चलती रहेगी। दारा चौहान का भाजपा से जाने का गम नहीं लेकिन उनका ये कहना भाजपा में पिछड़ो व दलितों का सम्मान नहीं है हास्यास्पद लगता है।

लोकदल के नेता व किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि दारा चौहान एक अच्छे इंसान हैं, दल छोड़ना, चुनाव लड़ना, दल बदलना ये उनका विषय है। सरकार में रहते हुए कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं कर पाए।

भाजपा पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रामप्रवेश राजभर का कहना है कि दारा सिंह चौहान को विपक्षियों ने भ्रम फैलाने के लिए हायर कर लिया है। लेकिन दारा चौहान यह भूल गये कि भाजपा भ्रम की नहीं धरातल की राजनीति करती है। जनता धरातल पर सब देख रही है, 10 मार्च ऐसे क्षणिक अवसरवादी नेता अपने आप धराशायी हो जाएंगे।

सपा नेता व मुहम्मदाबाद गोहना से टिकट के दावेदार हरेन्द्र सरोज कहते हैं केवल मंत्री ही नहीं विधायकों को भी पता ही नहीं चला कि वो सरकार में है। ना रूतबा ना विकास के लिए पैसा ना ही कही सुनवाई। यह तो होना ही था।

जिला कांग्रेस कमेटी जनपद मऊ के पूर्व जिलाध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे अवसरवादी राजनीति करने वाले जो हमेशा दल बदलते हैं, चुनाव के ऐन वक्त पर जीतने वाली पार्टी में जाकर दलबदल को बढ़ावा देते हैं, ऐसे लोगों को जनता को पूरी तरह नकार देना चाहिए। जो 5 वर्ष सत्ता का सुख भोगे तो सरकार में कोई खामी ही नहीं दिखी विधानसभा भंग हो गई, चुनाव की तारीखें तय हो गई, पद समाप्ति के तरफ है तो सरकार पर आरोप लगा रहे हैं ऐसे लोगों को विधानसभा चुनाव में जनता को बुरी तरफ शिकस्त देनी चाहिए।

भाजपा नेता सुजीत सिंह ने कहा कि दारा चौहान जैसे नेता समाज के लिए घातक हैं। 5 साल मलाई काटने के बाद इन्हें गरीबों दलितों और पिछड़ों, किसानों, नौजवानों की याद आई है। उन्होंने कहा कि आखिर भाजपा में वे कौन लोग हैं जो ऐसे मौकापरस्तों को महिमामंडित कर पार्टी में लाकर समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कराते हैं।

