शीतलहर में गर्भवती व शिशु का रखें विशेष ध्यान : सीएमओ

■ जिला महिला अस्पताल में निःशुल्क जाँच और चिकित्सा उपलब्ध
■ गर्भावस्था में भ्रूण विकास के लिए खायें चोकर युक्त आटा, दूध, दाल, बथुआ साग और पालक के साथ हरी सब्जियाँ
गर्भवती ठंडी हवा से स्वयं को बचाने के लिए ऊनी मोजे, दुपट्टे और शाल का करें प्रयोग
मऊ, 05 जनवरी (हि.स.) आजकल की शीतलहर में जरा सी भी लापरवाही गर्भवती या गर्भ में पल रहे शिशु के लिए घातक हो सकती है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे का।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया ठंड में गर्भवती महिला को सर्दी-खांसी, संक्रमण और शुष्क त्वचा की समस्या अक्सर हो जाती है। बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें। सर्दी में सिर से पैर तक खुद को जितना हो सके ढक कर रखें। गर्भवती ठंडी हवा से स्वयं को बचाने के लिए ऊनी मोजे और दुपट्टे और शॉल का प्रयोग करें। बुखार जैसी समस्या आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, जिला महिला चिकित्सालय, सदर अस्पताल जाएं। इन केंद्रों पर स्त्री रोग विशेषज्ञ आदि से परामर्श, जांच व दवा सब निःशुल्क उपलब्ध है।
ब्लाक बड़राव में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ उमुल ओला ने बताया कि इस कडकडाती ठंड में सुपाच्य खाद्य सामग्रियों का प्रयोग करें, जिससे शरीर में पानी के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। वहीं विटामिन-सी से भरपूर संतरा खाएं, इसके अलावा रात को सोने से पहले केसर या पौष्टिक पदार्थ युक्त दूध पियें जिससे शरीर को गर्मी मिले। गर्भावस्था में भ्रूण विकास के लिए शाकाहार में प्रोटीन से भरपूर चोकर युक्त आटा, दूध, पनीर, दाल, बथुआ साग, पालक के साथ हरी सब्जी खाएं और नानवेज को खाने वाली गर्भवती आवश्कतानुसार स्वच्छता से अंडे, चिकन, मछली का सेवन कर सकती हैं। इस के खाने से गर्भवती के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ रहता है। गर्भावस्था में ताजा भोजन प्रयोग करना चाहिये बासी दोनों के लिये नुकसानदायक हो सकता है। इस मौसम में सूखी त्वचा के कारण खुजली की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा गर्म पानी के सेवन करें। डॉ उमुल ओला ने बताया कि सर्दी-खांसी, जुकाम, संक्रमण और बुखार होने पर सबसे निकटतम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला महिला अस्पताल पहुँच कर तुंरत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श प्राप्त कर इलाज करें। हिन्दुस्थान समाचार/आनन्द कुमार

