यह विश्वविद्यालय शिलान्यास समारोह भर नहीं है, पूर्वांचल की सियासत को भाजपाई चाणक्य की साधने की कोशिश भी है..

@ अरविंद सिंह #त्वरित_ टिप्पणी
भाजपा के सियासी चाणक्य और देश के गृहमंत्री अमित शाह ने ‘मिशन पूर्वांचल’ की आज देश की सांस्कृतिक राजधानी और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी से शुरुआत कर दी. जिसकी विधिवत शुरुआत पूर्वांचल की बौद्धिक ज़मीन आज़मगढ़ से13 नवंबर को होने जा रही है और बहाना बनेगा- आज़मगढ़ की बहुप्रतीक्षित मांग- राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास कार्यक्रम और इसी स्थल पर एक विशाल जनसभा का आयोजन, जिसमें आजमगढ़ सहित पूर्वांचल के अन्य जिलों से भीड़ की आमद होने की संभावना है. जिसके लिए भाजपा नेता,सांसद, मंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और सरकारी महकमा युद्ध स्तर पर तैयारी में लगा है.
13 नवंबर का यह कार्यक्रम, केवल विश्वविद्यालय का शिलान्यास भर नहीं है बल्कि इसी बहाने आज़मगढ़ से पूरे पूर्वांचल की सियासत को साधने की भाजपाई कोशिश भी है. इसके लिए बड़ी संख्या में भीड़ जुटाने की तैयारी चल रही है. राजनीतिक रूप से यह कार्यक्रम कितना महत्वपूर्ण है कि इसकी तैयारी समीक्षा के लिए स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आजमगढ़ 5 नवंबर को आना पड़ा था और हर पल का अपडेट लिया जा रहा था और है.
आज काशी में जैसे अमित शाह का उड़नखटोला उतरा स्वयं मुख्यमंत्री योगी उनकी अगवानी करने पहुंचे. भाजपा के इस चाणक्य के साथ आज काशी में पूर्वांचल के मंत्री, जिलाध्यक्ष और प्रभारियों की जंबों बैठकों का दौर चलने की उम्मीद है. 2022 के विधानसभा चुनाव में
पूर्वांचल, अमित शाह की रणनीति का विशेष हिस्सा होगा और ऐसा लग रहा है कि वे इस पूरे अंचल को स्वयं बड़े गंभीरता से लेकर मानिटरिंग करेंगे. एक-एक सीट के लिए हर एंगल से समीक्षा करके टिकट दिया जाएगा.
बताते चलें कि पूर्वांचल में राजभरों में विशेष पैठ रखने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठजोड़ भाजपा से टूट गया है और नया गठबंधन सपा के साथ हुआ. पिछले दिनों इसके नेता ओमप्रकाश राजभर ने मऊ के हलधरपुर में बड़ी रैली करके सभी दलों की नींदें उड़ा दी है.
भाजपा के बारे में यह तय है कि वह किसी चुनाव को हल्के में नहीं लेती है और वह लगभग पांच बरस तक चुनाव ही लड़ती है. पन्ना प्रमुख से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक जैसे हमेशा चुनावी मोड में ही रहते हैं. शिखर पुरुष नरेंद्र मोदी भाषण और चुवावी क्षेत्र के सिद्धहस्त खिलाड़ी हैं. परिणामस्वरूप हमारे समय में उसका विस्तार होते चला गया. 2017 के चुनाव में जिस तरह से वह देश के सबसे बड़े सूबे में गैर पिछड़ी जातियों और हिन्दुत्व के सहारे यूपी की सत्ता में आमद की, वह एक ऐतिहासिक जनादेश था. यहीं से योगी आदित्यनाथ का उभार होता है. इस चुनावी बरस में योगी आदित्यनाथ, जिन कार्यो और मुद्दों को लेकर चुनाव में उतरेगें, उसमें पूर्वांचल की सियासत की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसे में आजमगढ़ से अमित शाह , रैली और शिलान्यास समारोह से क्या संदेश देगें. यह देखते बनेगा. फिलहाल योगी आदित्यनाथ का, भारतीय सियासत में एक नये उभार की सियासत चल पड़ी है, जिसे संघ ने आगे बढ़ाने का संकेत दिया है.दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक प्रस्ताव का पढ़े जाने और अमित शाह, राजनाथ सिंह के साथ प्रथम पंक्ति के राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठना दूरगामी सियासत के संकेत हैं. इससे स्पष्ट है कि योगी का क़द पार्टी में बढ़ चुका है और वे आज हिन्दुत्व का सबसे बड़ा ब्रांड एम्बेसडर बन ध्रुवीकरण की शुरुआत कर चुके हैं.

