जननेता आदरणीय हर्षवर्धन जी, स्वर्गीय नहीं, अमर पुरुष को मेरा नमन!

( यशोदा श्रीवास्तव )
पूर्वांचल की राजनीति को नई धार देने वाले जन नेता श्री हर्षवर्धन जी को स्वर्गीय मान लेना पूर्वांचल की लड़ाकू और संघर्षशील राजनीति का पतन मान लेना है. फिलहाल मैं ऐसा नहीं कर सकता.वेशक वे आज देह के रूप में हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके बाद शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब वे अपनों को न याद आते हों.
मुझे याद आता है उनका राजनीतिक सफर!,ओह! कितना दुर्गम भरा था.हार उनके हिस्से ज्यादा आई जीत कम लेकिन इस हारे हुए योद्धा से भ्रष्टाचारियों में जो दहशत थी,जीतने वाले से नहीं थी.उनकी इमानदारी,उनका संघर्ष और अवाम के लिए लड़ते रहना ही उनकी ताकत थी,वे अपने राजनीतिक सफर के अंत तक न डरें न झुकें.चाहे सत्ता हो या प्रशासन, लोगों के लिए भिड़ जाना उनकी राजनीति का अहम हिस्सा था.ऐसे तमाम उदाहरण है जो अन्य राजनीतिज्ञों से उन्हें अलग करती थी.महराजगंज हो या सारा यूपी,आज सत्ता और प्रशासन के जरिए जो कुछ हो रहा है,यकीन के साथ कह सकता हूं,कम से कम पूर्वांचल में उनके समकक्ष के राजनीतिज्ञों को हर्षवर्धन जी की याद जरूर आती होगी? जरूरत है आज राजनीति की नई पौध को हर्षवर्धन जी की राजनीतिक शैली और धार को याद दिलाते रहने की.निसंदेह वे युवा राजनीतिज्ञों की प्रेरणा स्रोत हो सकते हैं.वे अकेले ऐसे नेता थे जिन्हें देख उनके विरोधी रास्ता बदल देते थे.सांसद विधायक न रहकर भी जनता की आवाज बने रहना उनकी राजनीति की खास पहचान थी जो सबमें नहीं पाई जाती.
एक बार विधायक और दो बार सांसद रहे हर्षवर्धन जी की आज पुण्यतिथि है.यह उन्हें याद करने का खास दिन है लेकिन मैं उन्हें हर रोज और हर मौके पर याद करता हूं.वे लाखों लोगों के लिए खास थे लेकिन मेरे लिए वे खास से भी खास थे.विकास पुरुष, इतिहास पुरुष और अमर पुरुष आदरणीय हर्षवर्धन जी के चरणों में श्रद्धा का एक पुष्प मेरा भी.
सादर नमन
शत शत नमन!

