बेटी दिवस : “पापा और बेटी”

( किशोर कुमार धनावत )
पापा की राह देखती है बेटी,
आते ही लिपट जाती है बेटी।
किलकारियां गूंजती घर में,
मम्मी को जाकर बताती है बेटी।
शाम की चाय बनाती है बेटी,
दोनों को साथ बिठाती है बेटी।
गरमागरम पकोड़े लाती है बेटी,
बड़े प्यार से खिलाती है बेटी।
और,
पापा की आंखें कह रही है,
सदा यूँ ही मुस्कुराते रहना।
मेरे आंगन की नाजुक कली,
उस घर को महकाते रहना।
ना धन चाहिए ना संपत्ति चाहूँ,
बस तेरा जीवन सुखमय रहे।
तेरी बिदाई के बाद तेरा पापा,
अपने मन की बात किससे कहे।

रचना- किशोर कुमार धनावत,
रायपुर (छ.ग.)
२६-९-२०२१

