सामाजिक सरोकार, व्यापारी हित, संघर्ष की पहचान हैं उमाशंकर ओमर

( फतेह बहादुर गुप्त )
मऊ। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की इकाई मऊ जनपद में काफी बेहतर और अनुशासित तरीके से क्रियाशील है। परंतु जनपद मुख्यालय सहित पूरे पूर्वांचल में मंडल की अलख जगाने तथा कार्यक्रमों एवं संघर्षों की बदौलत नया तेवर और कलेवर प्रदान करने में उमाशंकर ओमर की व्यापक भूमिका रही है ।
उद्योग व्यापार मंडल के कार्यक्रमों और नीतियों के द्वारा व्यापारिक समस्याओं के समाधान तथा व्यापारिक उत्पीड़न पर विराम लगाने में ओमर का संघर्ष पूर्वांचल के व्यापारियों में ऊर्जा भरने का काम किया। व्यापार मंडल व्यापारिक संघर्ष का जीता जागता मंच बन गया है। आलम यह है कि व्यापारियों के ओज और सोच के इस मंच को सभी राजनीतिक मंच साझा करने का प्रयास कर रहे हैं । उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्वांचल के सह प्रभारी तथा जनपद इकाई के अध्यक्ष उमाशंकर ओमर की पारिवारिक पृष्ठभूमि आंदोलन और संघर्षों से भरी पड़ी है। वे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय राधे श्याम ओमर तथा श्यामवती देवी वैद्य के सुपुत्र हैं। आठ भाइयों एवं दो बहनों के बीच में दूसरे नंबर के भाई हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1945 को शहर के पठान टोला मुहल्ले में हुआ। उनकी प्राथमिक शिक्षा दीक्षा बाल निकेतन मठिया टोला में पीपल के पेड़ के नीचे हुई। जबकि मैट्रिक की शिक्षा उन्होंने डीएवी कालेज से पूर्ण की। उनके पिता स्वर्गीय स्वर्गीय राधेश्याम ओमर ने स्वतंत्रता आंदोलन में जमकर भागीदारी दी। परिणाम स्वरूप उनके विरुद्ध अंग्रेजी हुकूमत ने वारंट जारी कर दिया। भागकर मऊ चले आए। यहां भी आंदोलन के दौरान मऊ नोटिफाइड एरिया कार्यालय को फूंकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। छह माह की सजा भी कांटे। जब अंग्रेज पुलिस उनके हाथ में हथकड़ी डाल कर ले जाने लगी तो यह दृश्य उनकी माताजी सहन नहीं कर सकी । जिससे उनका ह्रदय गति रुक जाने से मौत हो गई।उनका अंतिम संस्कार करने के लिए उन्होंने सरकार से माफी नहीं मांगी। गोरी सरकार मजबूर होकर सेनानी राधेश्याम ओमर को पैरोल पर रिहा किया। तब उन्होंने अपनी मां के अंतिम संस्कार में भाग लिया ,और फिर जेल चले गए। आंदोलन संघर्षों की वीरगाथा उमाशंकर ओमर को अपने पिता से विरासत में मिली। इनकी माता श्यामवती देवी वैद्य परिवार से थी। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से लोगों की चिकित्सा करती थी। फिर 1983 में उनके पिता राधेश्याम ओमर कथा सन 2000 में उनकी माता श्रीमती श्यामवती देवी का स्वर्गवास हो गया। पारिवारिक आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उमाशंकर ओमर की शिक्षा दीक्षा मैट्रिक से आगे नहीं बढ़ सकी । ट्यूशन करके वे पारिवारिक गाड़ी का पहिया चलाने लगे। बाद में साबुन के कुटीर उद्योग से जुड़े। बाद में वे दुर्गा टेक्सटाइल जयपुरिया के कारोबार से जुड़े, और कठोर परिश्रम और इमानदारी की बदौलत अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से स्थापित किया। उनकी धर्मपत्नी से दो पुत्रियां ममता, सरिता तथा पुत्र आशीष एवं आनंद का उचित पोषण करते हुए उन्हें अच्छी तालीम दिलाई। सामाजिक चेतना कूट-कूट कर भरी होने के नाते उन्हें व्यापार के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों का निर्वहन दायित्व पूर्वक किया। वह कांग्रेस के नगर अध्यक्ष (युवा इकाई) बनाए गए। इस पद पर उन्होंने 10 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। बाद में प्रगतिशील नवयुवक संघ का गठन करके मऊ नगर के युवाओं में सामाजिक चेतना पैदा की। 30 वर्ष पूर्व वे उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े । दिवंगत तत्कालीन अध्यक्ष पंडित श्याम बिहारी मिश्रा तथा महामंत्री बनवारी लाल कंछल ने उन्हें जनपद का महामंत्री पद तथा बाद में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी। जिसका वे कुशलता पूर्वक निर्वहन आज भी कर रहे हैं। व्यापारिक हितों की रक्षा में सदैव अग्रणी भूमिका अदा करने वाले उमाशंकर ओमर ने उमर ओमर वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी संभाला ,और 5 वर्ष तक स्वजातीय बंधुओं को राष्ट्रीय मंच पर संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।पूरे भारतवर्ष में इस मंच के जरिए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। वे उमर ओमर वैश्य महासभा द्वारा स्वजातीय रत्न से भी अलंकृत हैं। पुत्रों के साथ मऊ में कंप्यूटर शिक्षा का श्री गणेश करने का भगीरथ प्रयास इन्हीं की देन है। कंप्यूटर से शिक्षा ग्रहण करने वाले देश और सऊदी गणराज्य में नौकरी कर रहे हैं। पूर्वांचल के लब्ध प्रतिष्ठित व्यापारी नेता उमाशंकर ओमर ने पूर्वी संसार को बताया कि मऊ का बुनकर उद्योग पुरातन पद्धति से जुड़ा हुआ है। जिसमें बदलाव की आवश्यकता है ।खासतौर से कच्चे माल तथा उसके डिजाइन में बदलाव लाना समय की आवश्यकता बन चुकी है। उस उद्योग में विद्युत की निरंतर आपूर्ति बहुत बड़ा मायने रखती है। लेकिन किसी भी सरकार ने बुनकरों की बेहतरी के लिए सार्थक प्रयास नहीं किया। बिजली आज भी अहम समस्या बनी हुई है। प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लगा। साड़ियों की खरीद-फरोख्त के लिए कोई सरकारी एजेंसी नहीं है। जिससे बुनकरों को अपनी पहचान नहीं बन पा रही है। बुनकर आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। श्री ओमर ने बताया कि सूरत तथा चाइना निर्मित साड़ियां मऊ के साड़ी उद्योग को चुनौती दे रही हैं । इन सबसे बचाव और संरक्षण के लिए आवश्यकता है कि सरकार अच्छी बुनकर नीति बनावे। व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उन्हें शस्त्र का लाइसेंस निर्गत करें। करों का बोझ कम करे। वर्तमान में श्री उमाशंकर ओमर स्वास्थ्य जनित समस्याओं से जूझ रहे हैं ।इसके बावजूद भी संगठन के लिए लगातार काम करते रहते हैं। यही नहीं प्रदेश सरकार के तरफ से उन्हें व्यापारिक कल्याण बोर्ड का मंडल स्तरीय सदस्य भी बनाया गया है। जिसकी वजह से वे उद्योग बंधु की बैठक में व्यापारियों की समस्याओं को शासन प्रशासन के समक्ष पूरी तल्लीनता और गर्मजोशी के साथ रखते हैं।
ईमानदार नेता की छवि रखने की वजह से शासन-प्रशासन में उनकी बेहतर शाख है। यही वजह है कि वे जब व्यापारियों की समस्याओं को उनके समक्ष रखते हैं तो प्रशासन भी उस पर पूरी गंभीरता से विचार करते हुए उस पर कार्रवाई करता है। यह उनकी बहुत बड़ी विशेषता है जिसकी वजह से उद्योग व्यापार मंडल संगठन शीर्ष पर है ।तथा जनपद के व्यापारियों के हितों के संरक्षक होने के नाते व्यापारी भी उन्हें मसीहा के रूप में देखते हैं। चुकी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष पंडित श्याम बिहारी मिश्रा का निधन कोरोना काल में हो गया। जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की कमान उनके सुपुत्र मुकुंद बिहारी मिश्रा को सौंपी गई है। जिनके नेतृत्व में व्यापार मंडल पूरी तरह से फल फूल रहा है। इनके नेतृत्व और दिशा निर्देशन में जनपद के समस्त नगर ,कस्बाई तथा प्रखंड स्तरीय व्यापार मंडल इकाइयां गठित है ,और क्रियाशील भी हैं। जो समय समय पर प्रदेश नेतृत्व के अनुसार कार्यक्रमों में भाग लेती हैं, और समस्याओं और उसके निराकरण के लिए मंच साझा करती रहती हैं।



