पुण्य स्मरण

अटल जी देश के एकमात्र ऐसे नेता थे जो अपने दल में ही नहीं, विपक्षी पार्टी में भी सम्माननीय रहे : प्रवीण गुप्ता

मऊ। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की पुण्य तिथि  जिलाभाजपा कार्यालय पर उनके छाया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही उनके जीवनि को याद करते हुए मनाई गई।
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार गुप्ता ने पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा की अटल जी देश के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो अपनी पार्टी में ही नहीं, विपक्षी पार्टी में समान रूप से सम्माननीय रहे हैं ।
उदार, विवेकशील, निडर, सरल-सहज, राजनेता के रूप में जहां इनकी छवि अत्यन्त लोकप्रिय रही है, वहीं एक ओजस्वी वक्ता, कवि की संवेदनाओं से भरपूर इनका भाबुक हृदय, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्थावान इनका व्यक्तित्व सभी को प्रभावित कर जाता है ।

ये देश के सबसे सफल प्रधानमन्त्रियों में से एक हैं । इनकी विलक्षण वाकपटुता को देखकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने यह कहा कि- ”इनके कण्ठ में सरस्वती का वास है । तो नेहरूजी ने इन्हें अद्‌भुत वक्ता की विश्वविख्यात छवि से नवाजा ।
श्री वाजपेयीजी की लेखन क्षमता, भाषण कला को देखकर श्यामाप्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय जैसे नेताओं का ध्यान इनकी ओर गया । 1953 में अटलजी को जनसंघ के प्रथम अध्यक्ष डॉ० श्यामाप्रसाद मुखर्जी का निजी सचिव नियुक्त किया गया । साथ में जनसंघ का सचिव भी बनाया गया । इन्होंने 1955 में पहली बार चुनाव मैदान में कदम रखा।
संयुक्त राष्ट्र संघ में इनका हिन्दी में दिया गया भाषण इन्हें एक कुशल वक्ता साबित करता है । आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण तथा अन्य नेताओं के साथ इन्होंने जेलयात्रा भी की । 19 अप्रैल 1998 को भारत को इन्होने प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली । ये 21 मई 2004 तक भारत के प्रधानमन्त्री रहे ।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी का सम्पूर्ण जीवन एवं इनके सम्पूर्ण विचार राष्ट्र के लिए समर्पित रहे हैं । राष्ट्रसेवा के लिए इन्होंने गृहस्थ जीवन का विचार तक त्याग दिया । अविवाहित प्रधानमन्त्री के रूप में ये एक ईमानदार, निर्लिप्त छवि वाले प्रधानमन्त्री रहे हैं । इन्होंने राजनीति में रहते हुए कभी अपना हित नहीं देखा ।

जिला मीडिया प्रभारी कृष्ण कांत राय ने कहा कि प्रजातान्त्रिक मूल्यों में इनकी गहरी आस्था है । हिन्दुत्ववादी होते हुए भी इनकी छवि धर्मनिरपेक्ष मानव की रही है। सन् 1992 में पद्मविभूषण तथा 1994 में श्रेष्ठ सांसद के रूप में पण्डित गोविन्द वल्लभ पन्त और लोकमान्य तिलक पुरस्कारों से इन्हें सम्मानित किया गया। ये एक कुशल राजनेता एवं जनप्रिय प्रधानमन्त्री के रूप में हमेशा से श्रद्धेय और सम्मानित रहे हैं ।
इस अवसर पर योगेंद्रनाथ राय, राकेश मिश्रा, नूपुर अग्रवाल, आनंद सिंह रैकवार, मनीष मद्धेशिया, मयंक मद्धेशिया, पुनीत यादव, अभिषेक राय, नीरज राही राधेश्याम सहित तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।
                                    

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