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आग से कई गांव का लगभग तीन सौ बिगहा गेहूं का फसल जलकर राख

रतनपुरा/मऊ। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल, दौड़ो दौड़ो आग बुझाओ, आग इधर बढ़ गई, आग उधर बढ़ गई, किसी तरह रोको गांव ना जलने पाए। हजारों की संख्या में लगभग आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के लोग जिसके हाथ में जो मिला है कोई बाल्टी का पानी लेकर तो कोई पेड़ की टहनियों को लेकर दौड़ रहा था। हर तरफ चित्कार ही चित्कार सुनाई दे रही थी। कोई रो रहा था तो कोई फायर ब्रिगेड कब आ रही है, कोई फायर ब्रिगेड नहीं आने की की बात पर कोस रहा था। यह हाल था रविवार को रतनपुरा विकासखंड के नसीराबाद कला ग्राम पंचायत का जहां अज्ञात कारणों से लगी आग पलभर में लगभग 3 सौ बीघे गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई। खून और पसीने से भारी लागत से तैयार फसल को आग के आगोश में जाते देख किसान खून के आंसू रो रहे थे, उनका कलेजा फट रहा था नसीराबाद कला, कुंसाडीह और उसरा में लगी भीषण आग की लपटें रुकने का नाम नहीं ले रही थी। आसमान में धुएं का गुबार लगभग 4 किलोमीटर पूर्व से ही दिखाई दे रहा था लेकिन ग्रामीणों ने अथक प्रयास कर एनकेन प्रकारेण कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

इस आग पर काबू पाने में जहां कई ग्रामीणों के चेहरे झुलस गए। वही आग बुझाने की दौड़ में कुछ घायल भी हो गए। सूचना पर थानाध्यक्ष हलधरपुर निहार नंदन कुमार, क्षेत्रीय कानूनगो गोविंद गुप्ता अपने अमले के साथ मौके पर पहुंचे। परंतु ग्रामीणों का एक ही उलाहना था इस सूचना के बावजूद भी भरा फायर ब्रिगेड नहीं पहुंची। सभी इस प्रशासनिक व्यवस्था को कोस रहे थे। नसीराबाद कला बलिया जनपद का समीपवर्ती गांव अतरौली, पहदेवाजीत, बिलौझा, अईलख आज गांव के लोग हजारों की संख्या में इस आग पर काबू पाने के लिए जूझ रहे थे। पुरुष, महिलाएं, बच्चे, वृद्ध सभी आग बुझाने के लिए जिससे जो संभव हो रहा था वह प्रयास कर रहा था। खैर कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 2 घंटे बाद किसी तरह आग पर काबू पाया गया लेकिन तब तक देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ फसल राख में तब्दील हो गई। आग बुझने के बाद भी कई ऐसे चेहरे थे कई ऐसे लोग थे जिनकी आंखों से आंसू धारा प्रवाहित हो रही थी। रोहित राजभर अपनी बेटी सुनीता राजभर की शादी 21 मई को तय किए थे। पलीगढ़ से बारात आनी थी, रो-रो कर यही कह रहे थे आखिर बेटी के हाथ पीले कैसे होंगे। जमा पूंजी सब राख हो गई। इसी का ही आसरा था, सर पकड़ कर बैठ कर रो रहे हैं। रो रहे थे और कह रहे थे 21 मई को ही बेटी की शादी है इसी गेहूं के बल पर मैंने बेटी की शादी रची थी अब तो सारा खेती राख में तब्दील हो गया। आखिर बेटी की शादी होगी कैसे लोग उन्हें चुप करा रहे थे लेकिन उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
इस आग ने सिवान में तीन झोपड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया झालू, भालू, नंदू और रामानंद की झोपड़ी आग की लपटों के आगोश में सिमटकर पूरी तरह राख में तब्दील हो गई थी। चारों लोगों की घर गृहस्ती उसी झोपड़ी में थी कुछ गेहूं की मड़ाई कर फसल रखे हुए थे, वह राहुल के साथ ही साथ घर गृहस्ती का सारा सामान जलकर राख हो गया। तन के कपड़े के सिवा कुछ भी नहीं बचा। आग ने हर तरफ तबाही का आलम पैदा कर दिया। कई लोग तो इतने हथप्रद हैं इस आगजनी से उनके मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी। आग की लपटों में ग्राम वासियों के भविष्य के सारे अरमान खाक में मिल गए। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के दावेदार जैसे ही सूचना मिली तभी उस स्थल पर दौड़ते हुए पहुंचे और सभी ग्राम वासियों के साथ लगकर आग बुझाने का काम कर रहे थे। जिस समय आगजनी की घटना हुई उस समय बिजली नहीं थी और बिजली न होने से आस पास नलकूप तो थे लेकिन उन नलकूपों को चालू नहीं किया जा सका लोग घरों से बाल्टी में पानी लेकर दौड़ रहे थे। इस भीषण अग्निकांड से गांव में हर तरफ भय और आक्रोश का माहौल था आग बुझ गई थी लोग प्रशासनिक अमले के साथ अपना अपना नाम दर्ज कराने के लिए एकत्र से तभी दूर सिवान से फिर आग की लपटें और धूल का गुबार उठता दिखाई दिया। पूरे ग्रामीण दौड़ पड़े और एन केन प्रकारेण दोबारा लगी आग को भी काबू में किया लोगों के मानस पटल पर आग की लपटों की डरावनी तस्वीरें दिखाई दे रही थी। एक तरफ तेज धूप तेज हवा और उड़ती भीषण आग की लपटें थी और दूसरी तरफ ग्रामीणों का समूह अपने जान को जोखिम में डालकर इस आग पर काबू पाने के लिए जूझ रहा था और आग पर काबू लगभग 2 घंटे की मशक्कत के बाद पा लिया। लेकिन फायर ब्रिगेड के ना आने का सभी के मन में अफसोस रहा दोबारा आग जब लगी और मुझे तो लोग कह रहे थे काश फायर ब्रिगेड के लोग आ जाते हैं और अपने पानी से सिवान की आग को जो दुबारा जल कर धुआ उठ रही है बुझा देते। कानूनगो गोविंद गुप्ता अपने लेखपालों के टीम के साथ इस आगजनी में जिनका जिनका खेत जला किसका कितना जला उसकी सूची तैयार करने में लगे रहे। ग्रामीण अपना नाम दर्ज कराने में लगे थे लेकिन कईयों को वहां शिकायत थी पिछले साल और आग लगी थी उनका जला भी था लेकिन उनको कुछ नहीं मिला। इस बार ऐसा ना हो पाए इस आगजनी में जिसको जिसको नुकसान हुआ है जिसका जिसका खेत जला है सब को सरकारी सहायता बिना भेदभाव के उपलब्ध हो। | जिन तीन झोपड़ियों को आग ने अपने आगोश में लिया था वहां किसी प्रकार बांधे गए पशुओं की जान बची लगभग एक दर्जन पशु वहां बांटे गए थे ग्रामीणों की भीड़ ने पशुओं का बंधन खोल कर उन्हें छोड़ दिया यह देखकर बेतहाशा भाग रहे थे

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