आकाशीय बिजली व बादलों को देख आज भी डरता है कृष्णा
● पक्का मकान न होने से टीन शेड में रहने को मजबूर है परिवार
(अशोक जायसवाल)

बिल्थरारोड / बलिया। उभांव थाना क्षेत्र के ससना बहादुरपुर गांव स्थित शनिचरा बाबा मंदिर के पास पिछले मंगलवार को आकाशीय बिजली गिरने से जहां एक युवक की मौत हो गई थी वहीं चार किशोर झुलस गए थे। आकाशीय बिजली का उक्त मंजर अब भी एक किशोर को भयभीत किये हुए है। बादल देखते ही वह आसपड़ोस के पक्के घरों की ओर भागने की कोशिश करने लग रहा है। उसकी यह हालत देख परिजनो में काफी मायूसी है।
क्षेत्र के चंदायरबलीपुर गांव के नरही टोला निवासी ज्ञानचंद राजभर का एकलौता बेटा कृष्णा अभी भी आकाशीय बिजली के खौफ से उबर नहीं पा रहा है। आज भी उसके मन-मस्तिष्क में वह मंजर समाया हुआ है। आकाश में छाए बादल उसकी बेचैनी बढ़ा दे रही हैं। पिछले मंगलवार को शनिचरा बाबा मंदिर स्थित फरही नाले पास आकाशीय बिजली से झुलसने वाले किशोरों में कृष्णा भी शामिल था जो बाराडीह स्थित अपने मौसी के घर रह रहा था।
अपने एक साथी को अपनी आंखों के सामने आकाशीय बिजली की भेंट चढ़ जाने व खुद सहित चार किशोरों के झुलसने की घटना उसे आज भी बेचैन किए हुए है। उसके गांव चंदायर बलीपुर के नरही टोला जब पत्रकारों की एक टोली उस किशोर का हाल जानने पहुंची तो उसके पिता ज्ञानचंद राजभर घर पर नहीं मिले। किशोर की माँ तारा देवी ने पत्रकारों को सामने देखा तो उनकी आंखों से झर-झर आंसू बहनें लगा। रुंधे गले से उन्होंने बताया कि उसकी पांच पुत्रियों के बीच यह एकलौता पुत्र है। गरीबी के चलते एकमात्र टीन शेड ही हमारा आशियाना है। कहा कि घर न होने के चलते बड़ी बेटियों को आज का माहौल देखते हुए रिस्तेदारों के यहां रखना उनकी मजबूरी बन गई है। कहा कि कई वर्षो पूर्व मिट्टी से बनी खपरैल का घर गिरकर खंडहर हो गया परन्तु गरीबों की की कौन सुनने वाला है। भारी बरसात में मिट्टी की बची एक दीवार के सहारे ही टिन शेड डालकर वह बच्चों के साथ रहने को मजबूर है। जानकारी दी कि कृष्णा के पिता ज्ञानचंद मजदूरी कर किसी तरह से परिवार का पालन पोषण करते है। कृष्णा कि स्थिति के बारे में कहा कि जब भी आसमान में बादल छा जा रहा है तो उसकी घबराहट बढ़ जा रही है तथा वह आसपास ईंट से बने पक्के घरों में जाने के लिए मचलने लग रहा है। वह किसी तरह से उसे उस वक्त संभालने में कामयाब हो रही है। कहा कि काश आज उसके पास भी एक आवास होता तो उसको इस प्रकार जिन्दगी जीने को मजबूर नहीं होना पड़ता।
