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संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान पर गंभीर हों : DM

● फ्रंटलाइन वर्कर को ब्लाक पर दी जाए कोरोना स्क्रीनिंग व संचारी रोगों से बचाव की ट्रेनिंग
● प्रत्येक गाँव में हो ब्लीचिंग पाउडर का नियमित छिड़काव
मऊ। कोरोना काल में संचारी रोगों से लड़ने के लिये सरकार ने मन बना लिया है और उससे बचाव किया जाये। संचारी रोग नियंत्र अभियान के तृतीय चरण (01 अक्तूबर से 31 अक्तूबर) की तैयारियों को लेकर वृहस्पतिवार देर शाम को जिलाधिकारी कार्यालय के लोक सभागार जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल की अध्यक्षता में हुई। शहर से लेकर गावों तक इस अभियान को सफलतापूर्वक चलाने के लिये जिलाधिकारी ने कोविड-19 ट्रेनिंग और प्रोटोकॉल पालन के निर्देश दिये।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि इस बार का संचारी व दस्तक अभियान विशेष रहेगा अब तक कोरोना महामारी को लेकर सभी प्रतिबंध हट चुके है और किसी को कहीं आने जाने का रोक नहीं है। इसलिये संक्रमण की संभावना ज्यादा है। फ्रंट लाइन वर्कर्स आशा संगिनी, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी, जिसमें गाँव के सभी घरों तक पहुँचकर जागरुकता के साथ ही साथ कोरोना की भी जांच होगी। इस दौरान तेज बुखार, सर्दी, खांसी आदि के लक्षण मिलने पर तत्काल प्रभाव से उसकी सूचना अपने क्षेत्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को दें ताकि उनकी समय से जांच कराकर इलाज सुनिश्चित किया जा सके। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि जल्द से जल्द सभी को ब्लाक पर अच्छी तरह से ट्रेनिगं दी जाये।
जिलाधिकारी ने कहा कि बारिश ख़त्म हो रही है जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा। उन्होने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के माध्यम से गावों में सफाई कर्मियों को निर्देश दिया कि कहीं भी कूड़े का अम्बार नहीं लगा होना चाहिए, उसे हटाने के बाद तुरंत ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। कूड़ा पड़ा होने उठाने के बीच समय ज्यादा हो तो उसपर भी ब्लीचिंग का ही प्रयोग करें। उन्होंने चेताया कि किसी भी हालत में चूने के पाउडर का छिड़काव नहीं होना चाहिये। जिलाधिकारी ने कहा कि कही उथले जल का जमाव हो तो उसके निकासी या सुखाने का प्रबंधन करना नहीं तो उसमे दवाई, डीजल या मिट्टीतेल का प्रयोग कर मच्छरों पर नियंत्रण करें। मास्क या फेस कवर का प्रयोग, हैंडवाश, सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के जागरूकता लाने पर बल दिया।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि इसके पूर्व दो चरण मार्च व जुलाई में संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया गया था। तृतीय चरण 01 से 31 अक्तूबर तक चलाया जायेगा। संचारी रोगों से बचाव ही इसका सबसे बेहतर उपाय है जिससे होने वाली बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है। वर्तमान में कोरोना की महामारी उससे बचाव में स्वच्छता के नियम सबसे बड़ा उदाहरण हैं। फ्रंट लाइन वर्कर्स संचारी रोगों के लक्षण दिखने पर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में सम्बंधित रोग विशेषज्ञ व डाक्टर को दिखाएँ और उन्ही की सलाह पर दवा लें। जिले में कोरोना के इलाज के लिये एल-1, एल-2 एवं एल-3 कोविड अस्पताल मौजूद हैं जहां पर सभी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों तथा फ्रंटलाइन वर्कर्स को संचारी रोगों के कारणों, रोकथाम तथा बचाव के उपायों, लक्षणों, उपलब्ध सुविधाओं तथा त्वरित उपचार की आवश्यकता के विषय में संवेदिकरण कर जन सामान्य को इन रोगो से बचाव किया जा सकता है। विभिन्न विभागों से समन्यव स्थापित कर नगर व ग्राम स्तर पर साफ सफाई, मच्छरों तथा रोडेन्टस की रोकथाम, असुरक्षित जल स्त्रोतों का चिन्हीकरण तथा स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। नियमित टीकाकरण से वंचित शिशुओं का चिन्हीकरण कर सचीबद्ध किया जाएगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पुरुष व महिला, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वेक्टर बार्न डॉ आर बी सिंह, सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक सेवास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षक व प्रभारी चिकित्साधिकारी, सम्बन्धित विभागों के अधिकारी, नगर पालिका व नगर पंचायत के अधिकारी, मलेरिया निरीक्षक श्री रमेश चन्द्र यादव, जेई कन्सल्टेंट डॉ उपेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

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