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सहायता प्राप्त अल्प संख्यक इंटर कॉलेजों सहायक अध्यापक भरती में संकट

मऊ। जनपद में तलीमुद्दीन इंटर कॉलेज, नोमानी इंटर कॉलेज, दारूल उलूम निस्वं इंटर कॉलेज, मिफ्टाहुल उलूम निस्वान इंटर कॉलेज, मोहम्मद अली इंटर कॉलेज इंदारा, नेशनल इंटर कॉलेज मोहम्दाबाद, पब्लिक बालिका इंटर कॉलेज बरामद पुर, गांधी इंटर कॉलेज मर्याद पुर इत्यादि शिक्षण संस्थानों को अल्प संख्यक संस्था की मान्यता प्राप्त है।

प्रदेश सरकार ने मार्च 2020 में निर्देश दिया था कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों में भी शिक्षकों की भर्ती अब लिखित परीक्षा से ही होगी।

इसके लिए परीक्षा एजेंसी भी शासन तय करेगा। इन कॉलेजों में भर्ती के नाम पर मनमानी और धांधली की शिकायतें आने के बाद यह फैसला किया गया था।

अब तक अल्पसंख्यक कॉलेजों का मैनेजमेंट प्रधानाचार्य, प्रवक्ता या सहायक अध्यापकों के पदों का विज्ञापन निकालकर सीधे इंटरव्यू से भर्ती कर लेता था। कुछ कॉलेजों में ऐसी भर्तियों पर विवाद भी हुआ था।

डिप्टी सीएम डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर मार्च 2020 को जारी आदेश में सरकार ने कॉलेज के प्रबंध तंत्र की भूमिका लगभग खत्म कर दी है।

    *आदेश के मुताबिक यह होगी नई प्रक्रिया*
  • माध्यमिक शिक्षा निदेशक लिखित परीक्षा के लिए एजेंसी चुनेंगे। इसके बाद पद के सापेक्ष पांच गुने अभ्यर्थियों की लिस्ट बनेगी। प्रधानाचार्य/प्रवक्ता के लिए 90 अंकों की लिखित परीक्षा और 10 अंकों का इंटरव्यू होगा। शासन की लिस्ट के आधार पर कॉलेज मैनेजमेंट इंटरव्यू करवाएगा।

सहायक अध्यापक की भर्ती केवल 100 अंकों की लिखित परीक्षा से होगी

  • चयन सूची को सक्षम अधिकारी को 6 महीने में अनुमोदित करना होगा। ऐसा न करने पर लिस्ट स्वत: अनुमोदित मान ली जाएगी।
    उत्तरप्रदेश में 500 से अधिक सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक इंटर कॉलेज हैं।

इस आदेश के बाद अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों के प्रबन्धक लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, मगर वहां से उनको कोई राहत नहीं मिली।

अल्पसंख्यक इंटर कालेजों ने सर्वोच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल की है, मगर वहां भी सिंगल बेंच में सुनवाई के लिए एक संकट पश्चिमी बंगाल का निर्णय बाधा है, इसलिए मामले कि सुनवाई फूल बेंच में ही होना उचित है।

मेरा ये लेख लिखने का मकसद ये है के सुप्रीम कोर्ट अन्तिम सहायता मिलने का विकल्प है, इसलिए वहां बड़े अधिकता को हायर करना पड़ेगा, जिसके लिए बड़ी धन राशि की आश्यक्ता होगी, इस लिए सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को गम्भीरता से विचार करके आगे कदम बढ़ाना चाहिए। अगर वहां भी चूक गए तो अगली सरकार भी कुछ नहीं कर पाएगी।

भारतीय संविधान अनुच्छेद 30 शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक -वर्गों का अधिकार

(1) धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्र्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

[(1क) खंड (1) में निर्दिष्ट किसी अल्पसंख्यक-वर्ग द्वारा स्थापित और प्रशासित शिक्षा संस्था की संपत्ति के अनिवार्य अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधि बनाते समय, राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी संपत्ति के अर्जन के लिए ऐसी विधि द्वारा नियत या उसके अधीन अवधारित रकम इतनी हो कि उस खंड के अधीन प्रत्याभूत अधिकार निर्बन्धित या निराकृत न हो जाए।]

(2) शिक्षा संस्थाओं को सहायता देने में राज्य किसी शिक्षा संस्था के विरुद्ध इस आधार पर विभेद नहीं करेगा कि वह धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक-वर्ग के प्रबंध में है।
 
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, तथा धार्मिक अधिकारों और विशेषाधिकारों की सुरक्षा के साथ – साथ जातीय अल्पसंख्यक देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की आधारशिला है। हिंदू बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी भारत का संविधान विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के कुछ अधिकारों का समर्थन करता है, और भारत के नागरिकों के धर्म, जाति या लिंग के सभी मूलभूत अधिकारों को स्पष्ट करता है।

अनुच्छेद 30 को भारतीय संविधान के भाग तृतीय (III) के तहत वर्गीकृत किया गया है और यह अनुच्छेद शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंध और अल्पसंख्यकों के अधिकार का समर्थन करता है।
 
अनुच्छेद 30 की विशेषताएं
समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ अधिकारों की रक्षा करने का प्रावधान अनुच्छेद 30 में शामिल है।

धर्म और भाषा के आधार पर सभी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित और प्रबंध करने का अधिकार है।

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