मोदी के नायाब मनोज़ सिन्हा को बड़ी जिम्मेदारी के बड़े निहितार्थ
(श्रीराम जायसवाल)
अखबार का कोना : कठुआ केसरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में रेल व संचार विभाग का मंत्रालय सम्भाल चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास पुरुष कहे जाने वाले मनोज सिन्हा को देश के सबसे संवेदनशील प्रदेश जम्मू कश्मीर का उपराज्यपाल बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू कश्मीर के प्रति रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। धारा 370 समापन के ठीक एक वर्ष बाद जब वहां कुछ रचनात्मक कार्य संपादित करने हैं ऐसे में मनोज सिन्हा की नियुक्ति नरेंद्र मोदी का बड़ा दाव है।
गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सांसद रहे और पीएम मोदी की कैबिनेट के प्रथम कार्यकाल में टेलीकॉम मंत्री और फिर रेल राज्यमंत्री रहे मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के इस्तीफे के बाद राज्य का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।
कश्मीर में धारा 370 हटा राष्ट्रपति शासन लगने के एक वर्ष पूरे होने के बाद अब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में चुनाव करवाना चाहती है जिसके लिए किसी राजनीतिक व्यक्ति की नियुक्ति बतौर उपराज्यपाल के तौर पर चाहती थी। जो कि तमाम राजनीतिक दलों से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर में आगे शांति बहाल कर सके और आने वाले समय मे वहां चुनाव हो सके।
गौरतलब हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कश्मीर के मामले को लेकर संजीदा रहे हैं। उन्होंने अपनी सरकार के पहले कार्यकाल में अनुच्छेद 370 को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। दूसरी बार जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की रणनीति पर काम शुरू किया। चूंकि इस बार केंद्रीय गृह मंत्रालय अमित शाह के पास था, तो उन्होंने बिना कोई देरी किए कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की राह तैयार कर दी। हालांकि इस मामले में शाह को पीएम मोदी का भरपूर सहयोग भी मिला। हालांकि पीएम मोदी कश्मीर मुद्दे का अपने तरीके से राजनीतिक समाधान चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने मनोज सिन्हा को चुना है। इसके पीछे खास कारण यह माना जा सकता है कि शुरू से ही सिन्हा की गिनती मोदी के खास विश्वासपात्रों में होती है। इसी भरोसे के चलते अब उन्हें उपराज्यपाल की कमान सौंपी गई है। जम्मू में खासतौर पर नौकरियों सहित तमाम सार्वजनिक जिम्मेदारियों व आधारभूत रचनात्मक ढांचे को लेकर असमंजस की स्थिति है। कश्मीरी पंडितों को दोबारा बसाने के लिए एक सटीक योजना पर काम करना होगा। कई मुद्दों के स्पष्ट न होने के कारण लोगों में बसे डर को दूर करना पड़ेगा। ये सभी काम सिन्हा की प्रमुख जिम्मेदारियों में शुमार रहेंगे।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रेल राज्य मंत्री और संचार राज्य मंत्री रह चुके सिन्हा पिछले साल गाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। उससे पहले यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उनका नाम मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में तेजी से उछला था। ऐसे में मोदी के भरोसेमंद मनोज सिन्हा की नियुक्ति ने केंद्र में भाजपा के लिए एक नया संदेश दे दिया है।
इस पद के लिए श्री सिन्हा की नियुक्ति के बाद पूर्वांचल सहित देश के सभी राजनीतिक पंडितों में यह चर्चा काफी तेज होती रही है कि वर्तमान परिस्थिति में जम्मू-कश्मीर देश ही नहीं बल्कि विश्व के तमाम बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों व UN जैसी संस्था की नजर में रहता है। ऐसे में मनोज सिन्हा उपराज्यपाल को पूर्ण प्रशासक के रूप में काम करने का मौका मिलेगा। फिलहाल जम्मू कश्मीर में 1 वर्षों से पूर्व धारा 370 समाप्त कर पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन चुनाव नहीं होने की वजह से अभी तक वहां की कमान उपराज्यपाल के हाथ में ही रहेगी। इस प्रकार श्री सिन्हा वहां के पूर्ण प्रशासक होंगे। गाजीपुर में लोगों ने कहाकि मनोज सिन्हा की कार्यकाल आने वाले समय में जम्मू कश्मीर से निकलकर भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सभी सिरमौर नेताओं की नजर में एक मील का पत्थर साबित होगा।
बचपन से मेघावी कठिन परिश्रमी व लगनशील मनोज सिन्हा बचपन के दिनों में ही विश्व हिंदू परिषद से जुड़ गए। काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग के साथ ही छात्रसंघ अध्यक्ष चुने जाना अपने आप में बड़ी कार्यकुशलता रही है। इसके साथ ही उनकी सुचिता इमानदारी कर्तव्य परायणता प्रधानमंत्री सहित पूरे देश में सम्मान का विषय बनी रहती है। चाहे उनका पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई के साथ का कार्यकाल रहा हो या मोदी सरकार का प्रथम कार्यकाल रहा हो मनोज सिन्हा हमेशा चर्चा में रहे हैं। ईमानदारी का सहज अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है एक तरफ जहां पूरे देश खासकर पूर्वी भारत में सभी नेताओं द्वारा अपने ही बेटे बेटियों को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में साथ लेकर चलने की परंपरा शुरू हो गई है। वहीं मनोज सिन्हा का बेटा गाजियाबाद के एक आईटी कंपनी में नौकरी करते हैं व बेटी विवाहोपरांत अपने पति के साथ विदेश में रहती है। लोकप्रियता का आलम यह कि मनोज सिन्हा गाजीपुर में जन-जन अपना नेता व बेटा मानता है, लेकिन उन्होंने अपने परिवार को राजनीतिक परिवेश से इतना दूर रखा 90% लोग उनके बेटे का नाम तक नहीं बता सकते। ऐसे में मनोज सिन्हा का जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल के रूप में वर्तमान कार्यकाल निश्चित रूप से उनके राजनीतिक जीवन में एक नया आयाम स्थापित करेगा जानकारों का माने तो उनके लिए जीवन की यह महत्वपूर्ण पारी होगी जिसमें उन्हें खुलकर अपने अनुभव वह बुद्धिमता का प्रयोग करने का अवसर प्राप्त होगा।



