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आजमगढ़ की डाॅ. लीना मिश्रा की पेंटिंग्स मुम्बई के ताज महल पैलेस में प्रदर्शित

मुंबई । सांस्कृतिक, साहित्यिक, कलाकृति के क्षेत्र का ऐतिहासिक धरोहर आजमगढ़ की निवासी डॉ लीना मिश्रा की पेंटिंग्स मुम्बई के ताज महल पैलेस में प्रदर्शित कर जनपद का मान-सम्मान बढ़ाया है।
स्पंदन ग्लोबल आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन, गोवा द्वारा आयोजित सेंचुरी सेलिब्रेशन के अवसर पर फाइव आर्टिस्ट्स एट फाइव स्टार वेन्यू के अंतर्गत फाइन आर्ट सेंटर की निदेशक डॉ लीना मिश्रा की आठ पेंटिंग्स ताज आर्ट गैलरी में प्रदर्शित हुई। जिसका उद्घाटन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के एमडी एंड सीईओ आशीष कुमार चौहान व एमएस, ओएनसीओ सर्जन एवं प्रतिष्ठित चित्रकार डॉ अनिल संगानेरिया, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता करण राज़दान व लेखक कलाकार चित्रकार व श्रीमती किरण राजदान (टैरो कार्ड रीडर) ने किया।
डॉ लीना मिश्रा ने अपनी पेंटिंग्स में आध्यात्मिक चेतना को केंद्र में रख कर मानव व् ईश्वर के अन्तर्सम्बन्ध को प्रदर्शित किया है। वस्तुतः कलाकार की स्वाभाविक जिज्ञासा ही उसे स्वयं को जानने की प्रेरणा देती है यह बात डॉ लीना के चित्रों में स्पष्ट परिलक्षित होती है। इनके चित्र ‘पंचतत्व’ जीव के जन्म से अनंत की यात्रा को दर्शाते हैं। इनकी पेंटिंग ‘सृजन की ओर’ में विनाश के बाद सृष्टि की निरंतरता के लिए स्त्री व पुरुष का शिव से आशीष पाकर आगे बढ़ना दिखाया गया है। जबकि ‘कैलाश मानसरोवर’, ‘शिवमयी माँ’, ‘अंकुरण’, ‘जीवन की डोर’ व ‘अनंत की ओर’ में डॉ लीना ने दिखाया है कि प्रकृति अपने मूल तत्व- जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी, आकाश से जीवन के अंकुरण को प्रस्फुटित करती है। इनके सभी चित्रों में अंतर्निहित ‘शंख’ जीवन की सकारात्मक ऊर्जा को व्यक्त करता है। ‘नेह की डोर’ व ‘शाश्वत राग’ पेंटिंग में दिखाया गया है कि जीवन की इस यात्रा में शाश्वत प्रेम सभी को एक डोर में बांधे रखती है।देश विदेश से आए दर्शकों ने इनकी कृतियों की खूब सराहा। सह कलाकार में नीना सिंह, शिल्पा लड़कड व् शास्वती देवनाथ पूना से बिंदु डी सलूजा जयपुर से थे। समापन समारोह में एमिनेंट आर्टिस्ट सत्यजीत शेरगिल व किरण चोपरा ने शिरकत की।

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