जितना प्रभाव श्रीराम व कुंती के पांचों पांडवों का था उतना प्रभाव अकेले हनुमान जी का था : रामशरन
मोहम्मदाबाद गोहना/ मऊ महापुरुषों की तपस्थली उदासीन ऋषि आश्रम संगत में गुरु पर्व महोत्सव के अवसर पर हो रहे प्रवचन के दूसरे दिन शनिवार को वृंदावन मथुरा से पधारे श्रीमद् भागवत एवं रामचरितमानस तथा श्रीमद्भागवत गीता के प्रख्यात एवं मर्मज्ञ श्री परम पूज्य प्रज्ञा चक्षु महंत श्री रामशरन दास जी महाराज ने हनुमान जी के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि- हनुमान शब्द का अर्थ होता है जो मान रहित हो अर्थात जिसके जीवन में अभिमान न हो। उन्होंने कहा कि प्रायः लोग कहा करते हैं कि नवग्रह हमें बहुत परेशान कर रहा है,लेकिन हनुमान जी की जीवन में तो तीन ग्रह ही थे।पहला भगवान के कार्य करने का आग्रह, दूसरा इंद्रियों पर निग्रह अर्थात संयम, तथा तीसरा सद्गुणों का संग्रह।यदि मनुष्य के जीवन में तीन ग्रह आ जाए तो नवग्रह अपने आप भाग जाएंगे। उन्होंने कहा कि जीवन में अभिमान की शून्यता होती है, तभी भगवान की कृपा बरसती है। हनुमान जी के चरित्र का सुंदरकांड में वर्णन किया गया है।
सुंदरकांड में सब कुछ सुंदर है। सीता सुंदर है,बंदर सुंदर है,कथा सुंदर है।हनुमान जी तो ऊपर से देखने में बंदर है लेकिन अंदर से सुंदर है। उन्होंने हनुमान जी महाराज के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा-
“रंग है रंगीले का दशरथ के छबीले का, कुंती के पांचों का तो अंजनी के अकेले का”
यहां पर रंग का तात्पर्य प्रभाव से है।उन्होंने कहा कि जितना प्रभाव श्रीराम का, कुंती के पांचों पांडवों का था उतना प्रभाव अकेले हनुमान जी का था।
इस प्रवचन में अयोध्या से पधारे बाबा प्रयाग दास, प्रयागराज से पधारे बाबा जयप्रकाश दास, वृंदावन से बाबा राजीव दास, बाबा हरदेव दास आदि ने भी प्रवचन के पश्चात आरती में उपस्थित होकर आरती की।
उदासीन आश्रम संगत के महंत सत्यनाम दास जी महाराज ने आरती के पश्चात पंडित योगेंद्र गौर शास्त्री मथुरा,पंडित जगन्नाथ मिश्र अयोध्या,कोठारी बाबा अयोध्या दास, मनोहर दास समेत सैकड़ों भक्तो एवम गुरुजनों ने प्रसाद ग्रहण किया।
यह प्रवचन मंगलवार तक प्रतिदिन होगा।24 को सायंकाल विशाल भंडारे का आयोजन है, तथा 25 को प्रातः प्रसाद वितरण का कार्यक्रम है।

