चुनावी चकल्लस : ए जी, का हो, अबकी घोसी से के ह ?
घोसी लोकसभा से प्रत्याशी कौन होगा यह अभी तक भाजपा-बसपा गठबंधन ने तय नहीं किया है। इसी विषय पर सुबह-सुबह मेरे मन ने मुझसे कुछ बात कही, इसे मैंने शब्दों का रूप देने की छोटी सी कोशिश की है। यह मेरे मन की बात भले ही है, लेकिन असल सच्चाई यही है कि यह बात लगभग सभी दलों के नेताओं की है जो अपनी बात अपने दल में कह नहीं पाते, लेकिन एक परिवर्तन चाहते हैं।
मेरी कलम से…
आनन्द कुमार
(चुनावी चक्कलस)
ए जी,
का हो,
अबकी घोसी से के ह ?
ऐ देखा, सुना, कुल बात करल करा,
लेकिन फालतू बात मत करा,
का फालतू बात ह जी,
बोलीं का फालतू बात ह,
फिर टायं टायं फिस्स हईं का आप,
2017 में त कहत रहलीं,
कि ए पारी बहरी के टिकट मिलल,
घबड़ा मत,
2019 में हमके जरूर मिली
कहां गईल तोहार 2019,
कहब त तनको हमार सुनब ना,
मत सुनी, बनल रहीं बड़का नेता,
न लईकन से मतलब, न हमार फिकिर,
न खेत क चिन्ता न घर से मतलब,
दिन भर पार्टी, दिन भर झण्डा,
अऊर त अऊर इमरतिया कहत रहे,
ऐ दीदी, नेताजी से मना कर देती,
जुगनुआ के पापा के,
मत ले जाएं रैली में,
घर में न दाल रहत ह न पिसान,
आपके का ह, आपन त आपन,
घर बर्बाद करत हईन,
साथ में दूसरों के,
न आप कुछ बनब,
न जुगनुआ के बाप क,
कवनो तरक्की होई,
बेमतलब क जिन्दाबाद,
अऊर बेमतलब समाज सेवा।
तब तक,
नेता जी के मोबाइल पर,
गेम खेल रही 11 साल की बेटी,
आकर कहती है,
पापा-पापा,
पार्टी कार्यालय से फोन आया था,
बोले हैं कि, नेताजी को कहो,
दो बजे पार्टी दफ्तर पंहुचें,
कतवारू को टिकट मिल गया है,
स्वागत समारोह है,
जाईं जी तैयार हो जाईं,
जल्दी करी, आप क,
बेटी खुशखबरी सुना देहलस,
अऊर सुनी घबड़ाईं मत,
2022 में फिर विधान सभा क,
चुनाव होई,
हो सकेला ओम्मे टिकट मिली।
बेटी जुगनुआ के पापा के बोल दे,
तैयार हो जायें पापा बुलावत हवन,
अरे-अरे तू चुप रहबी की ना रे,
का चुप रहीं, आप चुप-चाप जाईं।


