सैल्यूट सर, काश हर पुलिस सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय जैसी सोच रखता
(विकास राय)
चन्दौली। हर पुलिस वाला खराब नहीं होता, बहुतेरे अच्छे भी होते हैं और जो अच्छे होते हैं उनकी तारीफ ना हो उनके बारे में समाज जाने ना, तो इससे बुरा कुछ हो भी नहीं सकता। जब हम पुलिस की कमियां गिनाते हैं जब हम पुलिस की गलतियों पर सवाल खड़ा करते हैं तो हमारा फर्ज है कि अगर पुलिस नेक काम करे तो उसे अनेकों लोगों को अवगत कराएं।

चंदौली जनपद के सकलडीहा कोतवाली के नरैना गांव के समीप गांव की 2 बच्चियाँ जिनकी आयु 5 वर्ष व 6 वर्ष थी, दोनों सड़क के किनारे देर शाम शौच करने गई हुई थी। इस दौरान गांव में ही जा रही एक मोटरसाइकिल सवार असंतुलित होकर उन शौच कर रही बच्चियों को कुचल कर उनके ऊपर ही गिर गयी। जिससे दोनों बच्चियां गंभीर रूप से घायल होकर मरणासन्न अवस्था में पहुँच गई थी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल थाना प्रभारी लक्ष्मण पर्वत को दी थी तथा थाना प्रभारी ने यह सूचना तत्काल सीओ सकलडीहा त्रिपुरारी पाण्डेय को दी थी। थाना प्रभारी से विचार विमर्श कर तत्काल ही सीओ स्वयं दोनो बच्चियों को लेकर जिला अस्पताल पहुँचे थे। जिला अस्पताल के डाक्टर ने उनकी स्थिति काफी गंभीर देखते हुए उनको बीएचयू ट्रामा सेंटर रिफर कर दिया था। सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय ने मानवता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करते हुये बच्चियो के पारिवारिक स्थिति को देखते हुए स्वंय का एटीएम कार्ड अपने मातहत अनूप को देकर उन बच्चियों की देखभाल में साथ लगाया था। बीएचयू में पंहुचने पर पैसे न होने के कारण दोनों बच्चियों को भर्ती करने से मना कर दिया गया। कान्स्टेबल अनूप द्वारा भर्ती न किये जाने की सूचना पाते ही सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय ने अपने द्वारा दिए गए एटीएम से 20000 रूपये निकाल कर फौरन इलाज करवाने को कहा तथा किसी भी प्रकार की अन्य समस्या होने पर तत्काल सूचित करने को कहा। पुलिस क्षेत्राधिकारी त्रिपुरारी पाण्डेय की बदौलत दो मासूम बच्चियों की जिंदगी बच गयी। इनका यह कार्य प्रशंसनीय के साथ साथ अनुकरणीय है।


