71वीं बार रक्तदान करके भी नहीं थके संतोष
मऊ। मेरा जज्बा ही मेरा जुनून है, मेरा इरादा ही मेरा कोहिनूर है, मुझे सराहो या ना सराहो तुम, जरूरत मंद को जो काम आए, ऐसा मेरा खून है। हां बिल्कुल ही सटीक ये चन्द लाइने बैठती हैं जनपद के रतनपुरा कस्बा निवासी संतोष त्रिपाठी (मधुसूदन त्रिपाठी) पुत्र वेंकटेश त्रिपाठी जो वर्तमान में जौला ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इनकी खासियत यह है कि यह अपने को सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ रखते हैं। इनमें सबसे बड़ी खूबी है कि वह अब तक 71 बार रक्तदान कर चुके हैं। जिससे अनेक जिंदगियों को बचाया जा सका है। यही नहीं इन्होंने बीएचयू में मरणोपरांत नेत्रदान करने का अपना हलफनामा भी दाखिल कर चुके हैं। 
जरूरत मंद को ब्लड देना तो इनके आदत में शुमार हो गया है। आप जहां भी नौकरी करते हैं या गांव ही क्यो न हों अगर किसी को खून की आवश्यकता है तो रक्त दान करने से खुद को नहीं रोक पाते।
संतोष त्रिपाठी का कहना है कि वास्तव में रक्त दान करने में बड़ा ही आनन्द मिलता है। जो लोग रक्त दान करने से डरते हैं वह बिना वजह डरते हैं उन्हें एक बार रक्त दान करने की कोशिश करनी चाहिए उसके बाद वह स्वयं इस पुनीत कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने लगेंगे।

