बाजार से गायब है गुलाबी नोट, कहीं अर्थव्यवस्था पर संकट तो नहीं ?
(अशोक कुमार “अश्क चिरैयाकोटी”)
काले धन और नकली नोट पर लगाम लगाने के लिए सरकार के निर्देशानुसार भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई दो हजार रुपए की नोट इस समय बाजारों से गायब दिख रही है। वर्तमान समय में दो हजार रुपए की नोट एक आम आदमी के लिए सपना बनकर रह गई है। विदित हो कि 8 नवंबर सन् 2016 को सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा करते हुए 500 रुपये तथा 1000 रुपये की नोटों पर पाबंदी लगा दी गई थी। उस समय सरकार ने नोटबंदी का मुख्य कारण यह बताया था कि बड़े नोटों से काला धन जुटाने वालों को आसानी होती है। साथ ही नकली नोटों पर अंकुश लगाने की बात कही गई थी। इसलिए इन सबसे निपटने के लिए पाँच सौ रुपए और एक हजार रुपए के नोटों पर सरकार ने पाबंदी लगाया था। जिसके चलते उस समय पुराने नोटों को बैंकों में जमा करने के लिए कड़ाके की ठंड में कहीं-कहीं आधी रात से ही बैंकों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग जाया करतीं थीं। नोटबंदी के दो दिन बाद 10 नवंबर 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दो हजार रुपए की गुलाबी नोट जारी की गई थी। वित्त मंत्रालय के वक्तव्य के अनुसार मूल्य के हिसाब से मार्च सन् 2018 में नोटों के कुल सर्कुलेशन में 37.26 प्रतिशत हिस्सा दो हजार रुपए के नोट का था।जो तीन साल के अंदर ही मार्च 2021 में घटकर 17.78 प्रतिशत तक आ गया। वहीं पिछले दो वित्तिय वर्षों 2019-20 और 2020-21 में दो हजार रुपए के नोट की छपाई नहीं हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के अनुसार दो हजार रुपए के सन् 2016-17 में 3542.991 करोड़ नोट, सन् 2017-18 में 111.507 करोड़ नोट तथा सन् 2018-19 में 46.690 करोड़ नोट छपे थे। इस प्रकार दो हजार रुपए की कुल 3701.188 करोड़ नोटें प्रचलन में आयीं। इसी बीच पिछले लगभग सवा साल से लोग कोरोना की महामारी से जूझ रहे हैं। जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। परंतु इसी बीच चौंकाने वाला एक तथ्य यह भी सामने आया कि शादी-विवाह से लेकर बाजारों और बैंकों तक कहीं भी पिछले कुछ सप्ताह से दो हजार रुपए की नोट नहीं दिख रही है। वर्तमान में प्रचलन में सबसे बड़ी नोट केवल पांच सौ रुपए की नोट ही रह गई है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि आखिर दो हजार रुपए की गुलाबी नोट कहाँ गायब हो गई ? क्योंकि सरकार ने अभी न ही इस पर कोई रोक लगाई है और न ही वापस ली है। उसके बावजूद यह गुलाबी नोट नजर क्यों नहीं आ रही। कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस काले धन को बाहर लाने के लिए पांच सौ रुपए और एक हजार रुपए के नोटों पर पाबंदी लगाई गई थी, उसी कालेधन की शिकार दो हजार रुपए की गुलाबी नोट हो गई और जमाखोरों की तिजोरी में कैद हो गई ? शासन और प्रशासन को इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए अविलंब कठोर कदम उठाने चाहिए। अन्यथा भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इस तरह की चीजें घोर संकट उत्पन्न कर सकती हैं। जिनसे पार पाना आसान नहीं होगा।


