07 वर्ष की सजा वाले जेल में बन्द कैदियों की रिहाई शुरू, एडीजे और एक न्यायिक मजिस्ट्रेट शामिल
■ अब तक 16 बंदी हो चुके है रिहा, निःशुल्क रिहाई का जिम्मा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का
■ जेल प्रशासन के सहयोग के लिए, पांच पीएलबी और पांच पैनल अधिवक्ता नामित
मऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट और हाई पावर कमेटी की बैठक मे लिए गए निर्णय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी दिशा निर्देश के क्रम मे जेल मे कोविड संक्रमण को देखते हुए सात वर्ष की सजा वाले अपराध मे जेल मे निरूद्ध बंदियो को रिहा करने का आदेश दिया गया है। इसके लिए जिला जज ने दो न्यायिक अधिकारियों को नामित किया है। जिसमें एडीजे एफटीसी आसिफ इकबाल रिजवी को सत्र न्यायालय द्धारा विचारणीय मामलों मे जेल अधीक्षक की ओर से भेजे गए प्रार्थना पत्र पर रिहा करने का आदेश जैसा उचित समझेंगे पारित करेगें। वही मजिस्ट्रेट न्यायालय द्धारा विचारणीय मामलों मे निरुद्ध मामलों मे जेल अधीक्षक की ओर से भेजे गए प्रार्थना पत्र पर न्यायिक मजिस्ट्रेट/ सिविल जज जूनियर डिवीजन सदर वकील रिहा करने के लिए जैसा उचित समझेंगे आदेश पारित करेगें। बंदियो को यह सुविधा निःशुल्क जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराए जाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमे जेल अधीक्षक के सहयोग के लिए पांच पीएलबी और पांच पैनल अधिवक्ताओं को नामित किया गया है। जो जेल प्रशासन का सहयोग करेगें। और क्रमवार एक एक दिन के अंतराल पर जिला जेल पहुंचकर जेल के स्टाफ का सहयोग करेगें।
इसमें रामप्रीत कुशवाहा, बृजेश सिंह, फतेहबहादुर सिंह,निर्मला यादव और ज्ञान प्रकाश उपाध्याय को नामित किया गया है।
यह पूरी व्यवस्था जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बंदियों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। अगर किसी बंदी से अथवा उसके पैरवीकार से कोई इसके लिए रूपयों की मांग करेगा तो वह कदाचार यानि भ्रष्टाचार की श्रेणी मे आएगा। उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है।
ऐसे मे आमजन ऐसे किसी के बहकावे मे न आवे। अगर उनका मामला हाईपावर कमेटी की ओर से जारी गाइडलाइंस मे आता है तो वह निःशुल्क रिहा हो जाएगा। अगर कोई पैसे की मांग करता है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण म ऊ अथवा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के यहा शिकायत कर सकता है।

