आस्था

धर्म का सच्चा अनुयायी वही है जो दूसरे के धर्म का सम्मान करे और आपस में लड़ने की बजाय जोड़ने का काम करे

✍🏻 रोशनी जायसवाल…

“परमात्मा” जिनका वर्णन आज हर व्यक्ति के मुख पर मिलेगा अलग-अलग उल्लेखो के साथ कोई कहता राम की जुबानी, कोई बताता मोहम्मद की जुबानी, कोई कहता मेरा नानक दानवीर था, तो कोई कहता my Jesus is great.
एक ही परमात्मा को हमने अपने धर्म-जीवन के रूप में ढ़ाल लिया और लड़ते रहे, कटते रहे धर्म के नाम पर किसी को तब अपने परमात्मा कीयाद ना आयी की उन्हें कितना कष्ट होगा। अपने बनाये इस इंसान को देखकर जिसे उन्होंने प्यार -मोहब्बत बांटने को इस दुनिया में भेजा था पर आज तो यह सिर्फ नफरत की आग फैला रहा है । लोग अपनी- अपनी पवित्र ग्रंथों को लेकर आपस में लड़ते हैं पर अगर इस्लाम का क़ुरान, हिन्दू का रामायण व भागवत गीता, सिक्ख का गुरु ग्रंथ साहिब और ईसाई का बाइबिल में एक ही बात सिखायी गई है कि सबसे प्रेम से बोलो सबके साथ प्रेम से रहो आपस में विश्वास, प्रेम और भाईचारे का दीप जलाओ, अगर कोई प्रेम कि भाषा ना समझे तब उसपर प्रतिक्रिया दो। पर यहां तो कहने को सब पवित्र ग्रंथों का आदर करते है पर उसकी बातों पर अमल कोई नहीं करता चाहें वह किसी भी धर्म, समुदाय का हो हर कोई बस एक दूसरे का गला काटने में लगा और उम्मीद करता है कि उसे स्वर्ग ( जन्नत) नसीब होगी।
हमारे परमात्मा ने हमें सिर्फ इन्सान बनाकर भेजा। पर इस दुनिया में आंखें खोलने के बाद हम धर्मों में बंट गये लोग राम और रहीम के नाम पर लड़ते हैं जबकि सच तो यह है कि दोनों के मन प्रेम और भाईचारे से भावविभोर थे पर हम इन्सान होते हुए ऐसे आपस में हिंसात्मक प्रर्दशन करते और ना जाने कितने मासूमों निर्दोषों की जाने ले लेते कभी किसी राजनीतिक पार्टी के बहकावे में आकर हम आपसी भाईचारा को नफरत की आग मे जला देते जबकि सच तो यह है कि जरुरत होने पर पहले हमारे पड़ोसी का ही कंधा आंसू बहाने को मिलेंगे चाहें वो किसी भी धर्म से ताल्लुकात क्यो ना रखता हो हमारे दरवाजे पर ये राजनीतिक पार्टी खड़ी नहीं होती ।
लोग कहते है कि इस्लाम बुरा है पर लोग कैसे भूल जाते हैं कि हमारे पूर्व राष्ट्रपति एवम् महान वैज्ञानिक स्व. ए पी जे अब्दुल कलाम साहब भी एक मुसलमान ही थे पर उन्होंने कभी भारत का सिर कभी झुकने नहीं दिया और भारत को आजादी दिलाने में हर समुदाय के लोगों ने अपना लहू बहाया है। आज भी सरहद पर हर धर्म समुदाय के फोजी भाई भारत मां की सेवा में तत्पर खड़े हैं तभी हम और आप अपने घरों में सुरक्षित है , एक डॉक्टर ये नहीं देखता कि आप किस धर्म से ताल्लुकात रखते हो वो बस आपके इलाज में लग जाता है ‌
फिर हम और आप तो बस एक मामूली से इन्सान है तो फिर हमें किस बात का अभिमान है जो भारत मां के कलेजे को छननी करने में लगे हैं । अगर हम सब एकजुट हो जाए तो शायद हमारा देश विकसित से विकासशील हो जायेगा और फिर कोई भी हमें ऐसे आपस में बांटकर राज ना कर सकेगा। सच तो यही है कि वास्तव में धर्म का सच्चा अनुयायी वही है दूसरे के धर्म का सम्मान करे और आपस में लड़ने की बजाय जोड़ने का काम करे। किसी भी कौम का अगर एक व्यक्ति गलत निकल जाये तो हमें उस समाज के हर शख्स को देखने का नजरिया ईमानदार होना चाहिए।

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