रचनाकार

अब तो मरते-मरते मर रहे है जीने वाले और लाइन में खड़े है दारू पीने वाले

■ कवियत्रीयों ने कविता पाठ कार्यक्रम में सब रस युक्त रचनाएँ पढ़ी

■ रविवारीय ऑनलाइन काव्यगोष्ठी संपन्न

इंदौर। युवा सृजन कला मंच के बैनर तले महिला कवियत्रीयों की ऑनलाइन काव्यगोष्ठी रविवार को इन्टरनेट के माध्यम से सम्पन्न हुई। कवियत्रीयों ने श्रृंगार, करूण, हास्य, वीर रस आदि सबरस से भरी कविताओं पर भरपूर दाद पाई। बता दे कि ऑनलाइन काव्यगोष्ठी में सम्मिलित सभी कवियत्रीयां मंची कवियत्रीयां है। लाॅकडाऊन में कवि सम्मेलन बंद है। इसी कारण कवियत्रीयों ने ऑनलाइन काव्यगोष्ठी आयोजित की। सरस्वती पेंढारकर (इंदौर), निधि अमित महोदय (खंडवा), अर्चना फौजदार (अलीगढ़, उत्तरप्रदेश), अलका जैन (इंदौर) ने काव्यपाठ किया। संचालन सरस्वती पेंढारकर ने किया। आभार निधि अमित महोदय ने माना। यह जानकारी जितेन्द्र शिवहरे ने दी।

कवियत्रीयों की रचनाएँ-

हास्य-व्यंग्य

अब तो मरते-मरते मर रहे है जीने वाले
और लाइन में खड़े है दारू पीने वाले
हमें फैशन का शौक आज महंगा पड़ा
दर्जी मिल नहीं रहे है कपड़े सीने वाले

अलका जैन

खिलाफत नहीं की जमाने से मैंने
ना मैंने कभी भी हिमायत ही की है

मुझे क्या जमाने में क्या हो रहा है की होगी किसी ने बगावत जो की है

बिखेरा नहीं दर्द दिल में समेटा मेरे दिल ने हालांकि खिलाफत भी की है

जुर्रत नहीं आए आंखों में मेरी
मैंने आंसुओं को हिदायत ये दी है

कभी फलसफा मेरा जो सुन सको तो सुनो एक दफा तुम जुबा से हमारी

के पल-पल बदलते जमाने में अपने ठिकानों की जैसी फजीहत हुई है

ना तो गौर फरमाया अब तक किसी ने ना पूछा किसी ने कभी आते जाते

वो नन्हीं सी बच्ची जो सेहमी खड़ी है रात कल साथ उसके क्या हिमाकत हुई है।

-सरस्वती पेंढारकर

“स्वेटर में बच्चे”
बाल गोपाल, करते धमाल
सुंदर से, न्यारे से, लाल स्वेटर में बच्चे
जैसे कोई खिलता हुआ गुलाब,
इतना लाजवाब
कि कोई सुंदर ख्वाब
हमारी आंखों के सामने…
लगता है नाचने..
बच्चों की छोटी छोटी हथेलियां
हाथों में समेटती खुशियां,
लाल रंग की स्वेटर से झाँकते
जैसे चांद सितारे
कितनी सुंदरता से भरे
प्यारे प्यारे
लाल स्वेटर में बच्चे
ऊनी टोपी से ढँके..
उनके न्यारे चेहरे
उस पर उनकी मुस्कान
जैसे चांदनी और आसमान
जैसे सारा सौंदर्य खुद में समाए
पुष्पों से खिलखिलाए
लाल स्वेटर में बच्चे।

~निधि अमित महोदय

कहीं धूप है कहीं छांव है…..
जीवन तो आशा रूपी नांव है…!
राह बनाना तुम पानी में….!
कठिनाई से कभी ना डरना…!!
मन में आए जो सदा ….!
वही तुम काम करना…!!
टूटे हैं सपने यह सच है…
लेकिन टूटे सपनों को फिर से बुनना…!
आज हार गए तो क्या ..???
जीत स्वयं फिर खुद की चुनना..!!
तूफान में खड़ा रहे जो…
तरु वही टिक पाता है …!
हौसलों से ही व्यक्ति…
मुश्किल लक्ष्य को पाता है..!!
कोई तुमको यदि डराए….
गलत काम का पाठ पढ़ाए…!
दूर रहो ऐसी संगत से…
पीछा छोड़ो ऐसी लत से…!
जीवन की हर दौड़ जीतोगे..!
जब तुम लड़ना खुद सीखो गे..!!

अर्चना फौजदार (अलीगढ़ उत्तर प्रदेश)

प्रेषक-
जितेन्द्र शिवहरे
177, इंदिरा एकता नगर पूर्व रिंग रोड चौराहा मुसाखेड़ी इंदौर मध्यप्रदेश मोबाइल नम्बर
8770870151

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