चर्चा में

मेरे मन का मंथन “म” फैक्टर ही है कोरोना से बचाव : एड. अखण्ड प्रकाश पाण्डेय

कोरोना 2.0 में समस्त जनमानस वो गरीब हो या अमीर ,अर्श से फर्श तक के लोग इस महामारी से पीड़ित और डरे सहमे रहें है।
कोरोना 2.0 की शुरूआत “म” से मार्च माह में आया और मई माह तक प्रचंड रूप से अपना पॉव पसरे रहा।
मेरे मन का मंथन ये कहता है कि जिन व्यक्तियों ने “म” से महामारी से बचाव के लिए मंदिर, मस्जिद, मित्रता, महफ़िल, मांस, मदिरा,मार्केट, मेहमान इत्यादि से परहेज किया वो कोरोना को अपने आसपास भी नही भटकने दिया, “म” में ही कोरोना का बचाव भी है और “म” से मरीज़ बनने तक का सफ़र समाहित है।
“म” से महाराष्ट्र में 2.0 कोरोना प्रारम्भ हो कर पूरे देश मे प्रचंड रूप धारण किया और लाखों लाख परिवारों को “म” से मृत्यु के कारण उजाड़ दिया और अंत मे “म” से म्यांमार द्वारा नामित (ताउ ते) तूफान के आने के बाद कम हुआ।
“म” से मास्क कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ी जा रही वैश्विक जंग में अहम भूमिका रही है जिसके पहननें से संभावित संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
“म” से मददगार ही मसीहा बना- खाकी से ले कर को स्वस्थ व सफाई कर्मचारियों ने दहशत के साये को समाप्त कर 24 घंटे मुस्तैद रहे कर हिम्मत बढ़ायी, इस विपत्तिकाल में गरीब असहाय मजदूर को भोजन उपलब्ध कराने से लेकर संक्रमित जनमानस को दवा, एम्बुलेंस, ऑक्सीजन, चिकित्सक और समय पर चिकित्सालय तक पहुँचाया।
“म” से मस्तिष्क मनोवैज्ञानिक कहते है कि इंसान मानसिक रूप से स्वयं को स्वस्थ समझेंगे तो कोरोना का डट कर सामना कर पाएंगे और महामारी के मरीज़ नही होंगे।
“म” फैक्टर ने इस महामारी में जहाँ एक तरफ बहुत कष्ट दिए वहीँ इसके परहेज से ही बचाव भी हो सका।
तभी मनुष्य की मुस्कान बनी रहेगीं।
महामारी कम हुई है खत्म नही हुई है,सावधान रहें, सतर्क रहें सुरक्षित रहें.. – एड. अखण्ड प्रकाश पाण्डेय(पूर्व उपाध्यक्ष सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन मऊ)

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