बाढ़ पीड़ितों से मिलने पंहुची प्रधान रंजना, स्कूली बच्चों को नाव से ले आयी घर
मधुबन, मऊ। घाघरा नदी के विभीषिका अब थमने का नाम नहीं ले रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ाव से तटवर्ती इलाकों के छह राजस्व गांवों के हजारों लोगों में खलबली मच गयी है। हालांकि नदी का जलस्तर दो दिन तक स्थिर होने के साथ ही बुधवार से रफ्तार पकड़ लिया है। दुबारी के बाढ़ के पानी से घिरे गांव बैरकंटा व भगत का पुरवा में प्रधान रंजना सिंह गुरूवार की दोपहर नाव से लोगों की खोज खबर लेने पहुंची। छुट्टी होने के बाद स्कूली बच्चों को देख उनको अपने साथ नाव बैठाकर घर पहुंचवायी। नाव पर बच्चों के साथ प्रधान को देख अभिभावक उनकी जमकर तारीफ किया। वहीं बाढ़ के चलते प्रधान ने लोगों को अपने बच्चों के प्रति लापरवाही न बरतने की अपील किया। नदी खतरा बिन्दु से 16 सेमी. नीचे बह रही है। नदी जलस्तर की रफ्तार बढ़ने के साथ तटवर्ती इलाके के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। बाढ़ पीड़ितों की परेशानी अभी कम होने का नाम नहीं ले रही है। परसियाजयरामगिरी हाहानाला हेड पर खतरा बिन्दु 66.31 मीटर के सापेक्ष में बुधवार की सुबह दस बजे तक नदी का जलस्तर 66.10 मीटर रिकार्ड किया गया था। 24 घंटा बीतने के साथ ही गुरूवार की सुबह आठ बजे 05 सेमी. की बढ़ोत्तरी के साथ 66.15 मीटर पर पहुंचकर खतरा निशान को छूने को आतुर दिख रही है। घाघरा के जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाके के कई गांवों को बाढ़ के पानी से चारो ओर से घेर लिया है। इसमें चक्कीमुसाडोही, बिनटोलिया, दुबारी का नंदजी का पुरा, विसुन का पुरा, बैरकंटा, भगतका पुरा, मोलनापुर आंशिक आदि गांव व पुरवा शामिल हैं। बढ़ाव का सिलसिला नहीं थमा तो उक्त गांवों के लोगों पयायन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उधर तहसील प्रशासन ने बाढ़ आपदा से निबटने के लिए छोटी व बड़ी नावों की व्यवस्था कर बाढ़ चौकियों पर अपने कर्मचारियों की तैनाती कर दिया है। इस संदर्भ में एसडीएम निरंकार सिंह का कहना है कि बाढ़ आपदा से निबटने व राहत व बचाव के लिए तहसील प्रशासन पूरी तरह कमर कस लिया है।

