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एयू स्टूडेंट्स संगम में बोले एसपी इलाहाबाद, मऊ से मेरा गहरा लगाव, शैक्षिक मामलों में मेरा हमेशा रहेगा सहयोग

मऊ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे वर्तमान व भूतपूर्व छात्रों का एक शैक्षिक सम्मेलन “संगम” पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल के अनुरोध पर इलाहाबाद स्थित होटल कोहेनूर में रविवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसपी गंगापार, इलाहाबाद के पुलिस अधीक्षक सुनिल कुमार सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि मैं भी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का ही छात्र रहा हूँ, और स्टूडेंट्स लाईफ में आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा करते हुए कहा कि हमें परेशानियों से घबराना नहीं चाहिये मुश्किलें आती हैं लेकिन घबराने से समस्या का समाधान नहीं है, उन्होंने बताया कि हर कोई एक सपना लेकर बाहर पढ़ने के लिए निकलता है लेकिन जब वह काफी समय तक उसमें सफल नहीं होता है तो फिर वह यह सोचता है कि उसे कोई छोटी सी जाॅब ही मिल जाए, यहां तक तो ठीक है लेकिन उन्हें अपने उद्देश्य से भटकना नहीं चाहिए, उन्होंने अपनी स्टूडेंट्स लाईफ छात्रों से शेयर करते हुए बताया कि मैंने भी पहले नेट जेआरएफ क्वालीफाई किया, फिर कुछ दिन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाया भी लेकिन अपने उद्देश्य से भटका नहीं और तीन-तीन बार पीसीएस क्वालीफाई किया इन्होंने मऊ शहर से अपने गहरे सम्बन्ध का भी जिक्र करते हुए कहा कि मऊ में मेरी दो बार पोस्टिंग रह चुकी है एक बार सीओ सिटी के पद पर तो एक बार मऊ में एडिशनल एसपी भी रह चुका हूं उन्होंने कहा कि मऊ वालों के स्नेह प्यार को कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जहाँ भी उनकी ज़रूरत होगी वह हर तरह की सम्भव मदद करने के लिए तैयार हैं । कार्यक्रम की अध्यक्षता मऊ निवासी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति डा.सरफराज़ अहमद ने की। अपने सम्बोधन में श्री अहमद ने कहा कि यह प्रोग्राम एयू स्टूडेंट्स संगम मऊ के लिए मील का पत्थर साबित होगा, उन्होंने कहा कि किसी भी काम को शुरू करने के लिए मेहनत और लगन की ज़रूरत होती है, अड़चनें व विरोध तो होते रहते हैं किसी भी प्रोग्राम के बारे में जब लोग चर्चा करें तो समझ जाईये कि ये कामयाबी की ज़मानत है जैसा कि इन्होंने इस युनियन को संगम से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह संगम तीन नदियों का मिलन है लेकिन सरस्वती विलुप्त होकर बहती है इसी तरह यह संगम एसोसिएशन भी है ।सम्मेलन से मऊ वापसी के बाद संगम के प्रवक्ता सईददुज़्ज़फ़र ने बताया कि शैक्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता व मऊ निवासी राशिद ने कहा कि हमारा मऊ शहर आज भी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है, जिसका उदाहरण है कि हमें उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने शहर से दूर जाना पड़ता है, इन्होंने शहर में उच्च श्रेणी की लाईब्रेरी, कोचिंग की व्यवस्था, व गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की ।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से उर्दू विषय में रिसर्च कर रही छात्रा राशेदा ने अपने मऊ शहर के स्कूल कालेजों की व्यवस्था पर अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि मऊ के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था का स्तर आज के हिसाब से सही नहीं है, अध्यापक व अध्यापिकाओं के चयन में सतर्कता की आवश्यकता है, अध्यापक अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन सही ढ़ंग से नहीं करते, जिसका खामियाजा हम छात्रों को मऊ से बाहर निकलने पर उठाना पड़ता है, जब हम मऊ से बाहर शिक्षा ग्रहण करने निकलते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि हमने कुछ पढ़ा ही नहीं है, आगे इन्होंने कहा कि गाईड लाईन की कमी के कारण अपना उद्देश्य निर्धारित नहीं कर पाते, लोग आईएएस व पीसीएस अफसर बनने का सपना लेकर बाहर पढ़ने के लिए निकलते हैं लेकिन गाईड लाईन की कमीं के कारण यह सपना अधूरा रह जाता है। सर इकबाल पब्लिक स्कूल मऊ के मैनेजर व उर्दू पढ़ाओ तहरीक के संयोजक ओज़ैर अहमद गृहस्थ ने कहा कि पिछले दस सालों में शिक्षा के क्षेत्र में मऊ में बहुत विकास हुआ है, इसके लिए अरशद जमाल साहब के योगदान को नकारा नही जासकता है। जमाल साहब ने मुखलफत झेलने के बाद भी खामोशी के साथ अपनी कुर्बानियां पेश करते रहे, जिसका परिणाम ही है कि आज शिक्षा के क्षेत्र में मऊ तेज़ी के साथ विकास कर रहा है, उज़ैर साहब ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह समय आप लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक ऐसा समय होता है कि जब आप पढ़ाई में समय दे रहे होते हैं तो आपको डिप्रेशन करने वाले बहुत मिलेंगे, तरह-तरह के सवाल करेंगे कि आप इतने दिनों से पढ़ाई में क्या कर रहे हो, लेकिन इस से निराश होने की ज़रूरत नहीं है, ऐसे में हौसला रखने की ज़रूरत है तभी कामयाबी आपके कदम चूमेगी। पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने कहा कि मेरा हमेशा प्रयास रहा है कि सभी स्टूडेंट्स को एक प्लेटफार्म पर लाया जाए और एक ऐसी डायरेक्टरी बनायी जाये जिसमें अलग अलग युनिवर्सिटियों के अलग अलग विषयों के स्पेशलिस्ट को एकत्रित किया जाए
जिस से किसी को सहायता लेने में आसानी हो। आगे उन्होंने कहा कि मऊ में लड़कियों के अतिरिक्त लड़को के लिए भी किसी बड़े कालेज बनाने पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि मऊ में जो भी कालेज खुल रहे हैं वह सिर्फ लड़कियों के लिए हैं। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनसे जो भी सहयोग होगा उसे करते रहेंगे। नूसरत जहाँ रिसर्च स्कालर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने नेदा फाज़ली की गज़ल पेश की। डाक्टर नफीस अब्दुल हकीम ने सभी अतिथियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि चेयरमैन साहब का छात्रों के हित में उठाया जाने वाला कदम सराहनीय है। प्रोग्राम का संचालन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के भूतपूर्व छात्र ज़की अहमद एडोवकेट ने किया। इस अवसर पर डाक्टर फिरोज़ अख्तर, होज़ैफा शिमला, अताऊर्रहमान, आदिल सुमन, मुहम्मद सैफ, कासिम, तलहा, शादाब ज़हीर, मुनव्वर अली, आमिर अब्दुलहई, शहज़ाद, अजमल, लेयाकत अली, दानिश, इफ्फत के अतिरिक्त इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए मऊ के भूतपूर्व व वर्तमान छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

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