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“अजब-गजब इंसाफ इहा कै” के मंचन में खूब बजी ताली

(बृजेश कुमार गिरि)

मऊ। संस्कृति मंत्रालय(भारत सरकार)के सहयोग से समूहन कला के तत्वावधान में भ्राम्यान नाट्य के कुशल कलाकारों द्वारा हिंदी साहित्य के महान कवि व नाटककार भारतेन्दु हरिश्चंद्र के सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक’ अंधेर नगरी’ का राम प्रकाश शुक्ल ‘निर्मोही’ द्वारा किए गए भोजपुरी रूपांतरण अजब-गजब के इंसाफ इहाँ के’का मंचन राजकुमार शाह के निर्देशन में हिन्दी भवन मऊ में शुक्रवार शाम को हुआ। भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने अंधेर नगरी नाटक की रचना बनारस हिंदू थिएटर के लिए सन् 1881 में की थी। छः अंकों इस नाटक में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए उसे अपने ही कर्मों द्वारा नष्ट होते दिखाया गया है।
उक्त नाटक के भोजपुरी रुपांतरण ‘अजब-गजब के इंसाफ इहाँ के’ के प्रस्तुतीकरण में भारतीय नाट्य परम्परा के साथ-साथ पारसी थिएटर तथा पाश्चात्य नाट्य कला का संयोजन देखने को मिला।यह नाटक शासन -व्यवस्था की विद्रुपताओं से हमें अवगत कराने के साथ -साथ यह भी बतलाता है कि जो राजा चौपट होता है।वह प्रजा के लिए खतरनाक तो होता ही है ,स्वयं के लिए भी घातक होता है।
नाटक के कलाकारों अवनीश यादव, रिम्पी वर्मा, कविता सोनकर, रूपा,ऋषिकेश वर्मा आशीष सिंह, अजीत पटेल,सुजीत प्रजापति, राकेश,हर्षवर्धन गुप्ता, शेर सिंह राणा, अनुज मौर्या, सिद्धार्थ यादव व दीपक निषाद ने अपनी-अपनी भूमिका निर्वहन से दर्शकों का मनमोह लिया।नाटक में संगीत अर्जुन टंडन व प्रदीप पाण्डेय,कास्ट्यूम डिजाइन रोजी दूबे तथा प्रकाश परिकल्पना और संचालन टोनी दूबे का रहा।प्रोडक्शन कंट्रोलर की भूमिका का निर्वहन साधना सोनकर ने किया। राजकुमार शाह ने बताया कि प्रख्यात निर्देशक आत्मजीत के निर्देशन में कल शाम को ‘आला अफसर’ नाटक की विशिष्ट प्रस्तुति इलाहाबाद के टीम द्वारा की जायेगी।

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