खास-मेहमान

नाहीं लउके डहरिया के छोर गुइयाँ, पीड़ा पसरे लगल पोर-पर गुइयाँ

■मऊ निवासी भोजपुरी व हिन्दी के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवि श्री दयाशंकर तिवारी ने अपनी कविताओं से मोहा दर्शकों का मन

मऊ। देवकली देवलास: एक अद्भुत धार्मिक स्थल फेसबुक पेज पर रविवार, दिनांक 31/01/2021 को ऑनलाइन लाइव कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम के लिए मऊ के भोजपुरी व हिंदी के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवि दयाशंकर तिवारी को आमंत्रित किया गया था जिन्होंने अपने बेहतरीन गीतों व मुक्तकों की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया । उन्होंने भोजपुरी व हिन्दी, दोनों ही भाषाओं में देशभक्ति, प्रेम व सामाजिक विषयों पर मुक्तक व गीत प्रस्तुत कर खूब वाह वाही बटोरी । अपने काव्यपाठ की शुरुआत उन्होंने ‘है सड़क पर उतरकर मुखर आदमी, करता अपराध होके निडर आदमी’ मुक्तक से की। उसके बाद उन्होंने ‘कइसे मनाईं कोहाँइ गइल जिनिगी, अस कउनो अँतरा लुकाइ गइल जिनिगी’, ‘कोरी आशा के बल जी रहा आदमी, पी के मीठा गरल जी रहा आदमी’, ‘वस्त्र फिर द्रौपदी के हरण हो रहे, भीम-अर्जुन को देने चुनौती कठिन फिर सयाने दुःशासन, करन हो रहे’, ‘कइसे काटीं हो रतिया पहाड़ बलमा, सिहके पुसवा के जुलुमी बयार बलमा’, ‘सोनवा अस सुघर किरिनिया के नाम, बोल दिहा सुगना तू हमरो सलाम’, ‘देश में काम हैं कुछ अजूबे हुए, आदमी जिंदगी से हैं ऊबे हुए’, ‘कइसन कइले घडिलवा तइयार कोंहरा’, ‘ दुर्दिन के अभ्यस्त गृहस्थ के देहीं में लउकत जान न बाटे’ तथा ‘नाहीं लउके डहरिया के छोर गुइयाँ’ आदि गीत व मुक्तक सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने कमेंट के माध्यम से दर्शकों ने उनके काव्यपाठ की खूब प्रशंसा की । साथ ही उन्होंने देवकली देवलास के इतिहास एवं उसके पौराणिक महत्व के बारे में भी चर्चा की और इस स्थान से जुड़ी अपनी यादों विशेषकर देवलास मेले से जुड़े अपने अनुभवों को भी साझा किया । इस फेसबुक पेज के माध्यम से उस पौराणिक स्थल के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ कला, शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पेज के एडमिन. देवकान्त पाण्डेय द्वारा किये जा रहे प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की ।

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