उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद ने पकड़ा तूल

० उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व विधिक प्रस्ताव किया दाखिल! बिजली कंपनियों पर कठोर कार्रवाई की मांग!

लखनऊ, 21 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर कानूनी और नियामक संकट का रूप ले चुका है। उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में परिवर्तित किए जाने के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में एक लोक महत्व विधिक प्रस्ताव दाखिल किया।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं देश की सर्वोच्च सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों के हो रहे उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई।

परिषद ने आयोग के समक्ष कहा कि नई कॉस्ट डाटा बुक तथा बिजली दर आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, जिनमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि उपभोक्ता के पास पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों का विकल्प है। इसके बावजूद बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के साथ छल करते हुए जबरन प्रीपेड मोड लागू कर रही हैं।

 

                                      अवधेश कुमार

61 लाख स्मार्ट मीटर, 47 लाख बिना सहमति प्रीपेड

अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 61 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 47 लाख मीटर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5), उपभोक्ता अधिकारों और नियामक निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।

उन्होंने आयोग से मांग की कि उपभोक्ताओं को उनका संवैधानिक और कानूनी अधिकार सुनिश्चित किया जाए और बिना सहमति के प्रीपेड किए गए सभी मीटरों को तत्काल पोस्टपेड मोड में बहाल किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

उपभोक्ता परिषद ने आयोग के समक्ष माननीय सुप्रीम कोर्ट के 2024 के निर्णय
(माधव केआरजी लिमिटेड बनाम पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) को भी प्रस्तुत किया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि—
• प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ता का विकल्प है, बाध्यता नहीं।
• जब उपभोक्ता स्वयं प्रीपेड मीटर का विकल्प चुनता है, तभी उससे सिक्योरिटी राशि नहीं ली जा सकती।
• उपभोक्ता को विकल्प देने का अधिकार कानूनन सुरक्षित है।

परिषद की प्रमुख मांगें

उपभोक्ता परिषद ने आयोग से आग्रह किया कि—
1. स्मार्ट प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति के बाद ही लगाए या सक्रिय किए जाएं।
2. बिना सहमति प्रीपेड किए गए सभी मीटरों को तुरंत पोस्टपेड मोड में बदला जाए।
3. मीटर परिवर्तन की प्रक्रिया पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-मित्रवत बनाई जाए।
4. राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने वाली बिजली कंपनियों पर अवमानना व कठोर नियामक कार्रवाई की जाए।

3 करोड़ 62 लाख उपभोक्ताओं का सवाल

अवधेश कुमार वर्मा ने कहा—

“यह मामला प्रदेश के 3 करोड़ 62 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के हित से जुड़ा है। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्णय सामने है, नियामक आयोग को तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रहें और सार्वजनिक हित की रक्षा हो।”

परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले को आगे न्यायिक मंचों तक भी ले जाया जाएगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *