मिसाल-ए-मऊ

एक झटके में बीएचयू छोड़ कानपुर पढ़ने पहुंचे थे चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र

Ias durga shankar mishra

पवन कुमार पाण्डेय/आनन्द कुमार

● उत्तर प्रदेश के नये चीफ सेक्रेटरी दुर्गा शंकर मिश्र की कहानी, जिनका सफलता सदा कदम चूमती रही

मधुबन/ मऊ। वर्ष 2021 के आखिरी व नववर्ष 2022 के आगमन के पहले मऊ जनपद के शहीदी धरती मधुबन ने हर मऊ वासियों का मस्तिष्क गर्व से ऊंचा कर दिया। मऊ ही नहीं पूर्वांचल के गौरव पहाड़ीपुर गांव निवासी 1984 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व वर्तमान में भारत सरकार में आवास और शहरी मामलों के सचिव तथा दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के अध्यक्ष दुर्गा शंकर मिश्रा को उत्तर प्रदेश सरकार में चीफ सेक्रेटरी का पदभार मिलने की खबर पर चंहु ओर खुशी का माहौल है। जैसे ही इस बात की सूचना पैतृक गांव पहाड़ीपुर खिरिया के लोगों को हुई उनमें खुशी कि लहर दौड़ गई, लोग एक दूसरें को मिठाई खिला कर खुशी का इजहार किये। सोशल मीडिया पर लोगों ने मऊ के इस गौरव के प्रति बधाई दे रहे हैं।

परिवार के साथ अपने वोट का प्रयोग करने के बाद हर्षातिरेक आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)


बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाले दुर्गा शंकर मिश्रा हमेशा आगे बढ़ना ही सीखें, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर देखने की कोशिश नहीं की। कक्षा 5 तक गांव के ही प्राथमिक विद्यालय पहाड़ीपुर में शिक्षा लेने के बाद वे कक्षा 6 की पढ़ाई के लिए गांव के समीप गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज मारूफपुर में चले गए। वहां पर वे पढ़ाई करने के साथ, भारत सरकार के आवासीय छात्रवृत्ति कार्यक्रम में आवेदन किया था और उसमें उनका सलेक्शन हो गया। फिर क्या था श्री मिश्रा कक्षा 7 से हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई करने के लिए विकास विद्यालय रांची में चले गए। वहां पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने बीएचयू के लिए आईआईटी में आवेदन किया था। जहां उनका सलेक्शन हो गया और वह बीएचयू में पढ़ाई शुरू कर दिए। वहां 1 वर्ष पढ़ाई पूरा हुआ था कि उन्हें कुछ लोगों के द्वारा यह जानकारी हुई की बीएचयू से बेहतर कानपुर आईआईटी है और वे कानपुर आईआईटी में एडमिशन के लिए आवेदन कर बैठे। वहां भी उनका सेलेक्शन हो गया। श्री मिश्रा को कानपुर से बीटेक की पढ़ाई साढ़े 4 साल में पूरी करते ही उसी वर्ष उनका 3 सलेक्शन हो गया। जिसमें इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज तथा यूपी कैडर का आईएएस मिला और उन्होंने यूपी कैडर के आईएएस को चुना।

आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)

श्री मिश्र की 1984 में पहली पोस्टिंग चन्दौली जिले के चकिया तहसील के एसडीएम पद पर हुई। इसके बाद अपने कुशल प्रशासनिक अनुभवों से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर रहें। वर्ष 2010 में मायावती सरकार में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव के पद पर भी रहे हैं। श्री मिश्रा कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करने में अहम भूमिका निभाएं तथा मेट्रो के संचालन में इनकी कार्य कुशलता के चलते आज कई शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है ।
आपको बताते चले कि पहाडीपुर गांव मधुबन तहसील का वह गांव है जो अब तक लगभग एक दर्जन प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न पदों पर देश में सेवा दे रहे हैं।

आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)

श्री दुर्गा शंकर मिश्र के पिता स्व. पंडित मदन मिश्र बलिया में मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में बड़े बाबू थे और उनकी माता स्व. कुमारी देवी गृहणी थी। आपके भाई सत्यकाम मिश्र आयकर विभाग दिल्ली में चीफ कमिश्नर हैं। तथा उनसे छोटे भाई विनय कुमार मिश्र को ऑपरेटिव सोसाइटी कानपुर में रजिस्ट्रार हैं। इनके चचेरे भाई अवधेश मिश्र चंडीगढ़ में आयकर कमिश्नर हैं। चचेरे भाई दिनेश मिश्र आगरा में जीएसटी में कमिश्नर, चचेरे भाई अविनाश मिश्र बाल मजदूरों के लिए शिक्षा के लिए भदोही में सामाजिक कार्य करते हैं। भतीजा सुधांशु मिश्र सेना में कर्नल है, भतीजा डा. अक्षत मिश्र मुम्बई के जेजे अस्पताल में शैल्य चिकित्सक हैं। वे वर्ष में एक बार अपने गांव एक हफ्ते के लिए जरूर आते हैं। दुर्गा शंकर मिश्रा के ही प्रयास से मधुबन बेल्थरा मार्ग जो काफी जर्जर हो चुका था बना था। चचेरे भाई अविनाश मिश्रा बताते हैं कि भईया (दुर्गा शंकर मिश्रा) कहते हैं कि हमेशा विद्वानों के बातों को आत्मसात करना चाहिए सही मार्ग पर चलना चाहिए। कभी किसी का अहित नहीं करना चाहिए। वे सदैव असहयों का मदद करते हैं तथा उन्हें हौसला देते हैं।
गांव पर उनको इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की खबर पर लोग खुशी से झूम उठे और एक दूसरे को मिठाई खिलाए। इनके पलकधारी व कुंवर सहित अन्य साथी थे। इस मौके पर वकील अहमद, राशिद, धीरज मिश्रा, प्रतीक मिश्रा, अमित मिश्रा, विपुल मिश्रा सहित तमाम गांव के लोग रहें।

आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)
आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)
आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)
आईएएस दुर्गाशंकर मिश्र (फाइल फोटो)
मऊ के निवासी व सरकार में राजभाषा अधिकारी व कवी देव कांत पांडे के साथ आईएस दुर्गाशंकर मिश्र

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