मऊ के ऐतिहासिक स्थल

पूजा राय का प्रयास लाया रंग गोंठा में पर्यटन के विकास के संभावनाओं के लिए शासन ने मांगी डीएम से रिपोर्ट

( सचिन मिश्रा )

गोंठा/ मऊ। जिस गांव को भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली होने का गौरव प्राप्त हो, जहां तथागत ने अपने शिष्यों एवं भिक्षुओं को बौद्ध धर्म का संदेश दिया हो, तथागत ने बौद्ध गया बिहार में सिद्धि प्राप्ति के पश्चात परिभ्रमण की दृष्टि से पश्चिमी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के भागोें को प्राथमिकता दी। उत्तर में एक भीठा पर प्राचीन नंद बाबा के मंदिर के रूप में जाना जाता हो। मंदिर के समीप पीपल का एक विशाल वृक्ष है। मंदिर के अंदर एक लाट पर बोधिसत्व के रूप में गौतम बुद्ध की मूर्ति जिसे अनुमानत: लगभग दो हजार साल पुराना होना बताया जाता है ऐसे ऐतिहासिक धरोहर को संवारने और राष्ट्र के पटल पर लाने के लिए कोई समाजसेवी प्रयास करे तो उसके हर प्रयास को सराहा जाना चाहिए।
जनपद मऊ के सबसे बड़ी ग्राम सभा मे से एक गोंठा मे ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए जनपद की समाजसेविका एवं मधुबन-दोहरीघाट क्षेत्र मे जनता व राजनीति में पकड़ बना रही पूजा राय ने पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ विभाग के सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन वरिष्ठ IAS अधिकारी एन जी रवि कुमार को अपने प्रतिनिधि सौरभ राय के माध्यम से पत्रक सौंपा, उन्होनें शासन को बताया की ग्राम गोंठा मे प्राचीन रामशाला मंदिर है जो कि आस्था का केन्द्र है जिससे लगा हुआ पोखरा का सुन्दरीकरण करते हुए उसमे लाईटिंग व बोटिंग की व्यस्था की जा सकती है, साथ ही कहा की गांव मे 50 से अधिक तालाब, मोटल, 7 सरकारी स्कूल, पक्की नहर, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र, कृषि मण्डी केन्द्र के साथ प्रदेश में ही नहीं देश भर में मशहूर गोंठा का गुड़ जिसे GI tag मिला है शामिल है। इसके अतिरिक्त गांव मे पुरात्तव विभाग की संरक्षित साईट, खेल मैदान व कुछ पुराने मंदिर भी हैं। यह गांव बौद्ध सरकिट पर है व 2011 जनगणना के अनुसार 10000 से ऊपर की आबादी है, टाऊन दोहरीघाट से मात्र 2 km दूर है, इस प्रकार गोंठा मे पर्यटन के विकास एवं माडल विलेज बनाने की अपार संभावना है। पूजा राय के अनुरोध पर महानिदेशक व सचिव ने मऊ के जिलाधिकारी को उनके प्रस्ताव का परीक्षण करा DPR तैयार करने का निर्देश दिया है।

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