अपना भारत

हम अजेय हैं, हम काशी हैं

मेरी कलम से…
आनन्द कुमार

हम अविनाशी हैं,
हम काशी हैं,
हम गंगा की धारा सा,
निर्मल मन वासी हैं,
हम पावन, पुनीत,
संस्कृति, सभ्यता की,
सुन्दर सरल झांकी हैं।
हम काशी हैं, हम काशी हैं।।
हम विश्व धरोहर में हैं,
हम कर्मकांड में हैं,
हम सरस्वती की पावन भूमि,
हम कण-कण में संन्यासी हैं,
हम मर्यादा के अनुयायी,
हम धर्म व दान के साक्षी हैं,
हम काशी हैं, हम काशी हैं।।
हम काशी के विश्वनाथ हैं,
हम तुलसी और संत रविदास हैं,
भारत माता मंदिर की इतिहास हम हैं,
हम घाट-घाट की रवानी है,
हम युवाओं की जवानी हैं,
हम बुढ़ापे की कहानी हैं,
हम संगीत, स्वर और वाद्य यंत्र की,
मधुर संगीत दिवानी हैं,
हम काशी हैं, हम काशी हैं।।
हम काल भैरव हम ही कोतवाल हैं,
हम भक्ति की छठा निराली हैं,
हम औरत के तन पर बनारसी,
पूड़ी, कचौड़ी, जलेबी, लस्सी व,
चाट, पान, मलाई व बाँटी चोखा की,
लाजवाब स्वाद की कहानी हैं,
हम काशी हैं, हम काशी हैं।।
हम मालवीय की बगिया हैं,
हम विश्व पटल बुद्ध नामी है,
हम कबीर की भक्ति हैं,
हम मुंशी प्रेमचंद की वाणी हैं,
हम मर्णिकर्णिकाघाट पर मुक्ति हैं,
हम सदा अजेय हैं,
हम काशी हैं, हम काशी हैं।।

 

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