सेना के रिटायर्ड सैनिक का सीएम से गुहार! फ़र्ज़ी विवेचना करने वाले चौकी इंचार्ज को दें सज़ा!
० योगी जी ऐसा आपकी पुलिस ही कर सकती है! बेटे को फ़र्ज़ी विवेचना में फँसाने वाले चौकी इंचार्ज के खिलाफ पीड़ित बाप की मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार
मऊ के सहादतपुरा, स्वदेशी काटन मिल थाना कोतवाली निवासी भूतपूर्व सैनिक श्री प्रकाश पांडेय ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी को पत्र भेज कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने पत्र में मऊ कोतवाली व सारहू चौकी पुलिस पर माफिया मुख्तार अंसारी के गैंगेस्टर एक्ट में शामिल गुर्गे को संरक्षण एवं उसकी फर्जी रिपोर्ट लिखने की बात व उसे विवेचना में सच साबित करार देने का आरोप लगाया है।
श्री पांडेय ने कहा कि योगी जी, आप जिस माफिया राज को समाप्त करने की प्रतिबद्धता बार-बार दोहराते हैं, उसमें बाधक आपके ही कुछ पुलिस बन रहे हैं। मऊ में पुलिस माफिया के गुर्गों की मदद कर रही है।
कहा कि यह पत्र आपको बड़ी वेदना के साथ लिख रहा हूं। बताया कि मेरा बेटा श्रेयांश पांडेय जो बीएड का छात्र है पिछले वर्ष 16 जनवरी को सहादतपुरा किसी काम से गया था। उसी दौरान सड़क किनारे पेशाब कर रहे एक व्यक्ति को टोका। वह व्यक्ति शहर का बदमाश जावेद अख्तर उर्फ जावेद नाटे था।
उक्त जावेद नाटे को मेरे पुत्र का टोकना नागवार लगा और मेरे बेटे की अपन साथ मौजूद साथियों के साथ मिलकर जमकर पिटाई कर दी। सूचना पाकर मैं मौके पर पहुंचा और घायल बेटे को लेकर कोतवाली पहुंचा, जहां कोतवाल अनिल सिंह ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया।
इस दौरान मेरे अनेक पूर्व सैनिक साथी भी कोतवाली पहुंच एफआईआर दर्ज करने का दबाव बनाने लगे। कोतवाल के इनकार पर मेरे साथियों ने एसपी से बात की। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इस बात से कोतवाल नाराज़ हो गए।
इसके बाद मुख्तार का गुर्गे जावेद नाटे और उसके साथियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई। इससे नाराज़ जावेद नाटे ने मुझपर मुकदमा समाप्त कराने के लिए बेटे को आरोप वापस लेने के लिए दबाव और धमकी देना शुरू किया। बात नहीं मानने पर उसने छह जुलाई 2024 को बेटे श्रेयांश पांडेय और एक और युवक के खिलाफ शहर कोतवाली में मारपीट और अंगभंग का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया।
घटना रिपोर्ट दर्ज होने से लगभग बीस दिन पूर्व की स्वदेशी काटन मिल के पास रात को बतायी गयी, जिसमें घटना के दिन ही पुलिस की मौजूदगी में मेडिकल मुआयना की बात दर्शायी गयी। इस तथाकथित घटना के बाद सारहू चौकी प्रभारी शंकर यादव ने मात्र 25 दिनों में जांच पूरी कर मामला सत्य पाते हुए चार्जशीट पर्यवेक्षण अधिकारी सीओ के यहां न्यापयालय भेजने के लिए जमा कर दी। श्री पांडेय ने बताया की सीओ ने दरोगा शंकर यादव द्वारा की गयी विवेचना में खामियों को देखते हुए पुनर्विवेचना कराने के लिए रिपोर्ट एसपी को भेज दी। एसपी ने सीओ की रिपोर्ट के आधार पर मामले की पुनर्विवेचना शहर कोतवाली में तैनात एसआई अनिल द्विवेदी को करने का आदेश दिया। एसआई अनिल द्विवेदी की जांच में पूरा मामला फर्जी मिला। कथित घटना के समय आरोपी और गवाहों के मोबाइल लोकेशन अन्यत्र मिले। इसके बाद पूछताछ करने पर गवाहों ने घटना के फर्जी होने की पोल खोल दी। इसके बाद एसआई अनिल द्विवेदी ने पुरानी विवेचना को रद्द करने के लिए जांच रिपोर्ट भेज दी, जिसे महीनों अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दबाये रखा गया, लेकिन पीड़ितों की शिकायत पर एसपी के सख्त तेवर अपनाने के बाद आनन-फानन में एक दिन में ही विधिक राय के बाद पुरानी चार्जशीट रद करते हुए मामले में फाइनल रिपोर्ट की स्वीकृति मिली। इसके बाद 19 फरवरी को मामले की फाइनल रिपोर्ट प्रेषित की गयी।
श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जी मुख्तार अंसारी के गुर्गे गैंगस्टेर जावेद नाटे की कुछ पुलिस वालों से निकटता है। वे कोतवाली पुलिस की सुख-सुविधा की जिम्मेदारी निर्वहन करता है! और इसके बदले में पुलिस को अपनी आपराधिक गतिविधि का सहयोगी बनाकर अपने आतंक का राज चला रहा है।
पूरा प्रकरण पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में होने के बाद भी मुख्तार अंसारी के शातिर गुर्गे की फर्जी रिपोर्ट दर्ज करने वाले शहर कोतवाल और उनके प्रभाव में निर्दोष को दोषी करार देने वाले विवेचक शंकर यादव के खिलाफ आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यह विषय आपके संज्ञान में देते हुए मुझे विश्वास है कि ऐसे कृत्य करने वाले सरकारी कर्मियों को उनके कर्मो की सजा आपके माध्यम से अब जरूर मिलेगी।

