मऊ ! मां और पिता दोनों का फर्ज निभा संजू सिंह ने बच्चों को दिलाया मुकाम

मदर्स डे विशेष, पति भारत-पाक बार्डर पर शहीद, नहीं हारा हिम्मत
@ आनन्द कुमार…
मऊ। दो दशक पूर्व पति भारत-पाक बॉर्डर पर जम्मू कश्मीर में शहीद और घर में शहीद के बच्चे की उम्र महज 4, 8 व 10 वर्ष। ऐसे में किसी पत्नी के ऊपर देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले इस रणबांगुर के शहादत के बाद पत्नी, मां, बाप भाई रिश्तेदारों सहित इन तीन मासूमों पर क्या बीती होगी। कितनी दुश्वारियां, परेशानियों का सामना करना पड़ा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लेकिन पति के देश सेवा में शहीद होने के बाद भी पत्नी ने हिम्मत नहीं हारा, बल्कि बच्चों को देश का एक अच्छा नागरिक बनाने की उम्मीद की बदौलत सास, ससुर और अपनों के हिम्मत और हौसलों के सहारे जो सपना देखा उसे पूरा ही नहीं किया बल्कि आज उस मंजिल के करीब पंहुच कर एक मिसाल बनी हुई हैं। और यह मिसाल, मिसाल ए मऊ का हिस्सा। आज मदर्स डे में है और मदर्स डे की महता किसी परिवार में तब और बढ़ जाती है जब मां सिर्फ मां ही नहीं पिता की भूमिका भी साथ-साथ निभा रही हो।

हम बात कर रहे हैं मऊ जनपद के ग्राम कुचाई, पोस्ट सिपाह इब्राहिमाबाद व वर्तमान में मऊ नगर के ब्रह्मस्थान, सहादतपुरा निवासी श्रीमती संजू सिंह का, जिनके पति शहीद अखिलेश सिंह 5 नवंबर 2001 को भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर जम्मू कश्मीर में शहीद हो गए। शहीद अखिलेश सिंह के सेना में शहादत के समय उनकी सबसे छोटी पुत्री गरिमा सिंह महज 4 वर्ष की, उसके बाद बेटा अभिषेक सिंह 8 वर्ष और बड़ी बेटी खुशबू सिंह मात्र 10 वर्ष की थी। भारत पाक बॉर्डर पर तैनात शहीद अखिलेश सिंह बीएसएफ फ्रंटियर वाटर विंग बटालियन में थे। उनके शहादत के बाद पत्नी संजू सिंह ने सभी बच्चों को लेकर पैतृक गांव आ गई और बच्चों को शिक्षा को लेकर हमेशा सदैव सचेत रहीं। उन्होंने परिस्थितियों में परेशानियों का सामना तो किया लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारा। श्रीमती संजू सिंह की सास श्रीमती बच्ची देवी व ससुर स्वर्गीय रामाश्रय सिंह सदैव संजू सिंह का हिम्मत बढ़ाते रहें। श्रीमती संजू सिंह गांव में ही प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में अध्यापन शुरू कर दिया वे बच्चों को अच्छा शिक्षा देने के मद्देनजर 2004 में मऊ मुख्यालय पर आ गई और बच्चों का दाखिला केंद्रीय विद्यालय में कराया। उनके मझले पुत्र अभिषेक सिंह स्थानीय शिक्षा दीक्षा लेने के बाद छत्तीसगढ़ तकनीकी विश्वविद्यालय से बीटेक और एमटेक की उपाधि लिए तथा 2 वर्षों तक बतौर सहायक प्रवक्ता रायपुर के इंजीनियरिंग कालेज में काम किया। अभिषेक को 2021 में संयुक्त राज्य अमेरिका से शोध का आमंत्रण आया। अभिषेक अमेरिका के यूनिवर्सिटी आफ मियामी से डाक्ट्रेट की उपाधि ले रहे हैं। उन्हें छप्पन लाख रुपया भारतीय बतौर फैलोशिप मिल रहा है। श्रीमती संजू सिंह की छोटी बेटी डा. गरिमा सिंह इस वर्ष भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई राजकीय चिकित्सा संस्थान छत्तीसगढ़ से एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की है। तथा बड़ी पुत्री खुश्बू सिंह का विवाह 2018 में पंकज सिंह के साथ कर दी, उनका लखनऊ में रियल स्टेट का व्यवसाय है। श्रीमती सिंह अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार दिया।
वे बताती हैं कि उनके पुत्र अभिषेक सिंह भी अपने पिता की तरह भारतीय सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते थे। अभिषेक दो बार भारतीय सेना के आफिसर एंट्री परिक्षा उत्तीर्ण करके एसएसबी साक्षात्कार में शामिल हुए। अभिषेक ने निरंतर प्रयास किया लेकिन नियति को शायद कुछ और मंजूर था और अभिषेक अमेरिका में एडवांस मटेरियल पर शोध कर रहे हैं। विदेश में रहकर भी उनकी देश के लिए प्रेम, सम्मान व राष्ट्रभक्ति बना हुआ है। अभिषेक डाक्ट्रेट की उपाधि लेने के बाद भारत लौट कर देश के लिए सेवा देना चाहते हैं।
अपने बच्चों के प्रति पिता की शहादत के बाद श्रीमती संजू सिंह ने हर वह फर्ज निभाया जो उन्हें निभाना चाहिए था उन्हें मलाल है कि वह बेटे की इच्छा पूरी नहीं हो पाई और बेटा देश सेवा के लिए सेना में नहीं जा सका फिर भी उनका कहना है कि भले ही बेटा अमेरिका में पढ़ाई ले रहा है कर रहा है लेकिन वह अपने उस उपाधि के बदौलत भारत में ही सेवा देगा ऐसा वह चाहती हैं। शहीद अखिलेश सिंह के बड़े भाई सुभाष सिंह व छोटे भाई श्री प्रकाश सिंह भारतीय थल सेना से सेवानिवृत्त हैं।







#भारत-पाक बॉर्डर पर जम्मू कश्मीर में शहीद अखिलेश सिंह (फाइल फोटो)

