उत्तर प्रदेश

वह शख्स जिसने यूपी में पर्दे के पीछे रहकर सोशल मीडिया को धरातल पर उतारा

● चुनावी महाभारत में बड़ा योद्धा बनकर निकले ‘संजय’

यूपी में भाजपा सोशल मीडिया का इस चुनाव में गहरा प्रभाव है। ग्राउंड लेवल पर भाजपा के सोशल मीडिया की पहुंच का सफर एक दिन में नहीं हुआ है। इसके पीछे एक बड़े भाजपा के योद्धा का हाथ है, जिसका नाम है… संजय राय। संजय राय इस समय प्रदेश मंत्री हैं।
इसके पहले भाजपा के आईटी व सोशल मीडिया के हेड रहे तब उन्होंने सोशल मीडिया और वार रूम को लड़ाई का मैदान बनाने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी। जिला स्तर सोशल मीडिया की टीम खड़ी की। हर टीम में सदस्य बनाए गए।
आज उन्ही के दम पर भाजपा ने विपक्षी पार्टियों से बहुत आगे निकल चुकी है। मंडल स्तर पर आईटी विभाग व सोशल मीडिया सेल का गठन किया गया है।
क्षेत्र, जिला, महानगर के साथ ही हर विधानसभा क्षेत्र में टीम की सक्रियता है। मोबाइल फोन, इंटरनेट व सोशल मीडिया के जरिए, एक-एक मतदाता तक पहुंचने की व्यवस्था है।
बूथ स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप भी काम कर रहा है। भाजपा के वर्चुअल योद्धा पूरी तरह से तैयार हैं। वीडियो कांफ्रेसिंग का सेटअप तैयार है। डिजिटल वर्ल्ड में भाजपा की मजबूत उपस्थिति है। माइक्रो लेवल पर व्यूह रचना कोई आसान नहीं था। लेकिन संगठनिक दृढ इच्छाशक्ति से ये भी संभव हुआ। संगठन और पार्टी के युवाओं को मुद्दों और मुद्दों के साथ तर्कों के तीर चलाने में संजय राय की कोशिश ने निपुण बना दिया है। आज स्थिति ये है कि भाजपा की जिस ट्वीटर हैंडल पर कभी 1.5 मिलियन फॉलोवर थे, आज वो 3 मिलियन से अधिक हो चुके हैं। उनके नेतृत्व में सेवा ही संगठन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को एक मॉडल के रुप में लोगों ने देखा था। कोरोना काल में मदद पहुंचाने के लिए यूपी के सभी मंडलों और बूथ स्तर पर जो सेवा कार्य हो रहे थे, उसे एक दस्तावेज का शक्ल देने के लिए लगातार काम किए। भाजपा के 6 क्षेत्रों में जो कोरोना काल में सेवा कार्य हुए उसे सिर्फ तस्वीरों में नहीं एक इतिहास में दर्ज कराया। जो आज भी भाजपा की वेबसाइट पर मौजूद है।
संजय राय के सामर्थ्य और ऊर्जा को देखते हुए संगठन ने सदस्यता अभियान की बड़ी जिम्मेदारी दी। जब विपक्षी पार्टियां कैडिडेट का गुणा गणित कर रही थी, तब संजय राज गली -गली , मोहल्ले-मोहल्ले में सदस्यता अभियान की लड़ाई छेड़े हुए थे। लगातार रिकार्ड बना रहे थे। जिसका असर ये है कि भाजपा दबे पांव हर बस्ती, हर गली में पहुंच बना चुकी है। खास तौर से उन इलाकों में जहां विरोधियों की पैठ है।

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