यूपी की सियासत में किंगमेकर बनने की कोशिश में ओमप्रकाश राजभर

(आनन्द कुमार)

मऊ। देश की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी से गलबहियां करने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में स्थान पाने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकाश राजभर भाजपा से अलग होने के बाद उसकी सरकार को उखाड़ फेंकने की बार-बार राग अलापते-अलापते अब जिस समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की सरकार को पानी पी-पीकर गाली देते थे उन्हीं के साथ पहली बार 27 अक्टूबर को मऊ में अपनी पार्टी के 19 वें स्थापना दिवस पर उत्तर प्रदेश की राजनीति की महापंचायत के बहाने मंच साझा करने जा रहे हैं। मऊ की रैली की तारीख पहले से घोषित होने के बाद एक दिन अचानक ओमप्रकाश राजभर व अखिलेश यादव लखनऊ में मिलते हैं, और उस मुलाकात के बाद जैसे ही दोनों नेता अपने-अपने सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करते हैं उसके तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के हर छोटे-बड़े नेता नई दोस्ती की नई उम्मीद का बखान अपने-अपने सोशल मीडिया में करने लगे। अचानक इस तरह के खेल के बाद यह अटकले लगनी आम बात हो गई की यह खिचड़ी पहले से पक रही थी, मुलाकात ड्रामा था या असलियत कुछ और है। खैर कहते हैं न कि राजनैतिक दोस्ती में न कोई दोस्त होता है और नाहीं इस दोस्ती का कोई वजूद होता है। अब ओमप्रकाश राजभर की सपा से नई प्रेम की कहानी टिकाऊ है या फिल्मी बेवफा वाली यह तो वक्त पर छोड़ना होगा।


समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के साथ सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर बुधवार को मऊ में मंच साझा तो करने जा रहे ही हैं लेकिन उम्मीद और आशाओं पर ओमप्रकाश के साथ जो लगभग दस से ज्यादा अन्य दलों की महापंचायत में मौजूदगी होगी वे दल भी 2022 के राजनैतिक सफर में किसी ओर कुछ अच्छा पा जाएंगे या उनकी वोट की बदौलत ओमप्रकाश राजभर और अखिलेश यादव राजनीति कर जाएंगे यह सवाल भी चाय की दुकानों पर जनता चर्चा करने लगी है।

खैर ओमप्रकाश राजभर की सपा से दोस्ती की सियासत की यह नई पैंतरेबाजी मऊ की धरती से पूर्वांचल को निशाना बना कर उत्तर प्रदेश की सियासत में अगली सरकार बनने व बनाने का दावा, नई दोस्ती कितने दिन टिकेगी इसको लेकर चर्चा ए दौर तो अभी से शुरू हो गया लेकिन ओमप्रकाश राजभर के दांवपेंच की राजनीति विधानसभा चुनाव 2022 के काफी पहले अभी से गलबहियां करना नए मित्र के साथ, और भाजपा, बसपा, कांग्रेस की राजनैतिक चाल का शान्त रहना, चुनाव आते-आते राजनीतिक समीकरण बनने बिगाड़ने व भविष्य में परिणाम क्या होगा कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। कभी समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की सरकार पर सवाल उठाने वाले सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर बुधवार को जब पहली बार मऊ की धरती पर मंच साझा करेंगे तो वह पुराने लगाए गए आरोपों का क्या होगा जो रैली आते-आते सोशल मीडिया के खूब वायरल हो रहा है। खैर 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ मऊ की धरती से पहली रैली कर ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा के साथ दोस्ती का आगाज किया था, तथा उसके साथ मिलकर चुनाव लड़े थे, कुछ दिन ही भाजपा के साथ उनके रिश्ते चले और बाद में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देकर भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया। अब देखना होगा कि चुनाव आते-आते ओमप्रकाश राजभर अपने मूल वोट की बदौलत यूपी की सियासत में किंगमेकर बनने की कोशिश में कितने पास होते हैं और कितने फेल।

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