रचनाकार

शब्द मसीहा की कहानी : पैसों से नहीं खरीद सकते

@ शब्द मसीहा केदारनाथ…

वह नौजवान बड़ा खुशी-खुशी डॉक्टर के पास पहुँचा और बोला – “डॉक्टर साहब! हमारी माँ के पेट में आप दो साल पहले पथरी बताए थे । दो बार हम दर्द की दवा भी लेकर गए थे ।”

“तो आज क्यों आए हो ?”

“डॉक्टर साहब ! बात ये है कि हमारी माँ बहुत जिद्दी थी। हमारे पास कोई नौकरी नहीं थी , पढ़ाई कर रहे थे , सो माँ ने साफ-साफ कह दिया कि बबुआ जब तुम्हारी नौकरी लगेगी, तब ही हम ऑपरेशन कराएंगे अपना। ”

डॉक्टर बुरी तरह से हैरान हो गया , उसे अपने बचपन के दिन और अपनी माँ याद आ गई ।

“तो ले आओ अपनी माँ को । हम चेक कर के ऑपरेशन कर देंगे और पथरी निकाल देंगे ।” डॉक्टर बोला ।

“नहीं साहब ! माँ तो अब नहीं रही साहब , दो साल पथरी को इस उम्मीद से सहती रही कि मैं कामयाब हो जाऊंगा तो ऑपरेशन करवाएगी। आज वो मेरी कामयाबी देखने को ज़िंदा नहीं है, पर मैंने वादा किया था । तब आपने साठ हजार बताए थे , अब कितने पैसे देने हैं?”

“तुम पैसे किस लिए दे रहे हो मुझे ? पागल हो गए हो क्या ?” डॉक्टर झल्लाते हुए बोला ।

“नहीं साहब, हम पागल नहीं हुए हैं, बस माँ को दिया वादा निभा रहे हैं । हमारे जैसा कोई आए तो उसकी माँ का ऑपरेशन कर देना ….क्या है कि नौकरी की आस में ये माँ अपनी जान तक पर खेल जाती हैं, तो किसी और माँ का ऑपरेशन कर देना। हर माँ की जान कीमती होती है , और इसे पैसों से नहीं खरीद सकते। ” और उसने नोटों की पोटली डॉक्टर के सामने रख दी।

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