खास-मेहमान

जिन्दगी जीना भी जरुरी है

आज बहुत बारिश हुई थी . चारों तरफ रास्तों में पानी भरा हुआ था . आफिस पहुँचते समय देर हो गई थी .

“रत्ना जी ! आखिर आप आ ही गईं . समय भी देखा है आपने . पूरे पौने घंटे लेट हैं .” इंचार्ज बोला .

“सर ! बाहर जो हाल है उसमें आफिस पहुँचाना भी आसान कहाँ था . मेरे वो तो मना ही कर रहे थे .”

“हाँ, ये तो है . आज लगता है स्टाफ कम आएगा . जरा काम की स्पीड बढ़ाकर काम कीजिये . हो सकता है आज बॉस भी आ जाएँ .” रत्ना अपने केबिन की तरफ बढ़ गई और काम में जुट गई .

शाम पाँच बजे करीब इंचार्ज ने देखा कि एक आदमी रत्ना के केबिन में बैठा हुआ है और रत्ना ख़ूब हँस रही है . वह सीधा केबिन में चला आया .

“रत्ना जी ! ये कौन है ? क्या काम पूरा हो गया ?”

“सर! ये मेरे पति हैं . आज बारिश बहुत है इसलिए मुझे लेने आए हैं . काम पूरा हो गया है .”रत्ना मुस्कुराते हुए बोली .

“हाँ, सर ! पत्नी को साथ ले जाऊँगा तो वह सेफ रहेगी . जिन्दगी है तो सब है . आज हम स्पेशल खाना बनाने वाले हैं . आप भी आ सकते हैं .” रत्ना का पति बोला .

“नहीं दोस्त ! मुझे स्पेशल खाना खाना है . मेरी पत्नी को मुझे भी लेना चाहिए . वो मुझसे आज न जाने को कह रही थी . मेरे बच्चे भी घर आ गये होंगे . आप इन्हें ले जा सकते हैं . काम के साथ परिवार के साथ जिन्दगी जीना भी जरुरी है.”

शब्द मसीहा

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