दिव्यांग व्यापारी की चिट्ठी बनी भरोसे की मिसाल, संदीप बंसल ने दिया संबल
लखनऊ। डिजिटल युग में जहाँ ई-मेल और सोशल मीडिया संवाद का सबसे तेज़ माध्यम बन चुके हैं, वहीं लखनऊ के एक दिव्यांग व्यापारी अंबिका प्रसाद ने आज भी डाक द्वारा लिखित पत्र के ज़रिये अपनी पीड़ा और उम्मीद को अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल तक पहुँचाया — और यही पत्र आज मानवीय संवेदनशीलता की एक मिसाल बन गया।
लखनऊ के मोहान रोड, सेंट्रल वेयर हाउस के पास स्थित अंबिका ट्रेडर्स के संचालक अंबिका प्रसाद शारीरिक रूप से विकलांग हैं और उसी दुकान के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
दिनांक 9 जनवरी 2026 की रात लगभग 1 बजे, जब नो-एंट्री के बाद माल उतारने का समय वैध होता है, तब उनकी दुकान पर ईंटों से भरा ट्रक पहुँचा। लेकिन 112 पुलिस वाहन द्वारा बिना कारण बताए ईंटें उतरवाने से रोक दिया गया, जिससे ट्रक वापस लौट गया और व्यापारी को ट्रांसपोर्ट व लेबर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
इस घटना से आहत होकर अंबिका प्रसाद ने अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल को एक भावुक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई।
पत्र प्राप्त होते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने इसे “अत्यंत महत्वपूर्ण” बताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा —
“अंबिका प्रसाद जी, आप निश्चिंत रहें। भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी आपको अनावश्यक रूप से परेशान नहीं कर पाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि —
“हमें इस बात पर गर्व है कि आप हमसे अपरिचित होते हुए भी केवल व्यापार मंडल के नाम पर विश्वास करके पत्र के माध्यम से अपनी बात रखने पहुँचे।”
व्यापार मंडल ने इसे न सिर्फ एक व्यक्तिगत समस्या, बल्कि दिव्यांग व्यापारियों के सम्मान और आजीविका से जुड़ा विषय बताते हुए प्रशासन तक मजबूती से रखने का आश्वासन दिया।
यह घटना यह साबित करती है कि संवेदनशील नेतृत्व, संगठन पर विश्वास और मानवीय दृष्टिकोण आज भी जीवित है — और एक साधारण व्यापारी की चिट्ठी भी बड़ा बदलाव ला सकती है।

