वीरेंद्र यादव की कमी सदैव खलेगी: प्रलेस मऊ की श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकारों को किया गया नमन
मऊ। प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) मऊ की ओर से रविवार को बलिया मोड़ स्थित जिला कार्यालय पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता प्रलेस मऊ के अध्यक्ष डॉ. वसीमुद्दीन जमाली ने की। इस अवसर पर प्रलेस उत्तर प्रदेश के संरक्षक वीरेंद्र यादव एवं महान साहित्यकार प्रो. राजेंद्र कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सभा का संचालन करते हुए डॉ. अजय कुमार मिश्र ने 16 जनवरी को दोनों साहित्यकारों के निधन को प्रगतिशील लेखन परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार वीरेंद्र यादव के साथ बौद्धिक विचार-विमर्श का अवसर मिला। वे जितने सरल व्यक्तित्व के थे, उतने ही गंभीर और विचारोत्तेजक वक्ता भी थे।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रलेस उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष डॉ. संजय राय ने कहा कि वीरेंद्र यादव एक गंभीर अध्येता, सशक्त आलोचक और प्रेमचंद साहित्य के मर्मज्ञ थे। उन्होंने लंबे समय तक प्रलेस उत्तर प्रदेश के महासचिव के रूप में संगठन को दिशा दी। आज जब देश में सांप्रदायिक शक्तियाँ उभार पर हैं, ऐसे समय में वीरेंद्र यादव का असमय जाना प्रगतिशील साहित्य जगत के लिए निस्संदेह अपूरणीय क्षति है।
डॉ. अब्दुल अजीम खान ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वीरेंद्र यादव के निधन से प्रगतिशील साहित्य को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है।
सभा की अध्यक्षता करते हुए डॉ. वसीमुद्दीन जमाली ने कहा कि विगत 11 जनवरी को ज्ञानरंजन जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते समय वीरेंद्र यादव द्वारा व्यक्त किए गए विचार और संस्मरणों से ज्ञानरंजन जी की रचनात्मकता को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। उस समय कहीं यह आभास नहीं हुआ था कि वह उनका अंतिम सार्वजनिक वक्तव्य सिद्ध होगा।
सभा के अंत में दिवंगत साहित्यकारों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया गया।

